लीबिया: गद्दाफ़ी समर्थक सैनिकों को खदेड़ा

शहर पर विद्रोहियों के कब्ज़े के बाद गद्दाफ़ी के समर्थक सैनिकों ने पूर्वी हिस्से को फिर अपने नियंत्रण में लेना चाहा, लेकिन प्रदर्शनकारियों और सरकार का विरोध कर रहे लोगों ने सेना की कोशिशों को नाकाम कर दिया.
संघर्ष की शुऱुआत में आ रही खबरों से लग रहा था कि अत्याधुनिक हथियारों से लैस लीबियाई सेना का पलड़ा भारी है लेकिन विद्रोहियों ने ब्रेगा पर कब्ज़ा बरक़रार रखा. शहर में मौजूद एक चिकित्सक के मुताबिक इस लड़ाई में कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई है.
बरेगा में मौजूद बीबीसी संवाददाता के मुताबिक इस संघर्ष में शामिल विद्रोहियों में से ज़्यादातर बेनग़ाज़ी से आए थे. इनमें कई ऐसे लोग थे जो कुछ दिन पहले तक लीबीयाई सेना में शामिल थे. सरकार विरोधी प्रदर्शनकारी पहले ही बेनग़ाज़ी शहर पर कब्ज़ा कर चुके हैं.
ब्रेगा में मौजूद बीबीसी संवाददाता ने संभावना जताई कि गद्दाफ़ी के सैनिकों को हथियार खत्म होने की वजह से पीछे हटना पड़ा. ब्रेगा शहर लीबिया के प्रमुख शहरों बेनग़ाज़ी और अज्दाबिया के नज़दीक है. खबरों के मुताबिक इस घटना के बाद लीबियाई सरकार की ओर से शहर में मौजूद विद्रोहियों पर दो मिसाइल हमले भी किए गए.
बीबीसी में रक्षा मामलों के संवाददाता निक चाइल्ड्स के मुताबिक लीबिया की सेना भले ही अत्याधुनिक हथियारों से लैस और ज़्यादा संगठित हो लेकिन दूर दराज़ इलाकों को विरोधियों के कब्ज़े से छुड़ाने के लिए इतना काफ़ी नहीं. गद्दाफ़ी ने कहा है कि वो अपने खिलाफ़ अंतिम व्यक्ति के लड़ने तक इस विद्रोह का मुकाबला करेंगे.
सेना की ताकत लगातार विरोधियों के सामने कम होती जा रही है यहां तक की कई सैन्य अधिकारी और सैनिक बाग़ी हो चुके हैं. ऐसे में किसी भी एक पक्ष का बेहद मज़बूत होना भले ही मुशिकल हो. लेकिन सेना और विरोधियों के बीच बढ़ती झड़पें बाहरी दखल की संभावना को मज़बूत करती हैं.
इससे पहले कर्नल गद्दाफ़ी ने एक टेलिविज़न संदेश में कहा था कि वो अपने खिलाफ़ अंतिम व्यक्ति के लड़ने तक इस विद्रोह का मुकाबला करेंगे. इस बीच ब्रिटेन और फ्रांस ने कहा है कि वो ट्यूनीशिया-लीबिया सीमा पर फंसे हज़ारों शरणार्थियों को निकालने के लिए विमान और जहाज़ भेजेंगे. ये शरणार्थी फिलहाल बेहद मुश्किल परिस्थितियों में हैं और खाने-पानी की लगातार बढ़ती कमी के बीच अपने वतन लौटने का इंतज़ार कर रहे हैं.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने कहा है कि सीमा पर फंसे लोगों की जान दांव पर है और लगातार बढ़ती शरणार्थियों की संख्या ने 'गंभीर मानवीय संकट" पैदा कर दिया है. ट्यूनिशिया सरकार के मुताबिक अब तक 80 हज़ार से ज़्यादा लोग लीबिया से पलायन कर ट्यूनिशिया की सीमा में दाखिल हो चुके हैं.












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