2 से 4 रुपए तक बढ़ सकते हैं पेट्रोल के दाम

लीबिया समेत अन्य तेल उत्पादक देशों में जारी राजनीतिक अस्थिरता के कारण कच्चे तेल के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर निकल चुके हैं। कच्चे तेल के दामों में हुई भारी बढ़ोतरी से पेट्रोल के दाम एक बार फिर बढ़ने की आशंका की जा रही थी। अब वित्त मंत्री ने बजट में कच्चे तेल पर सीमा शुल्क पांच प्रतिशत, पेट्रोल और डीजल पर इसे साढ़े सात प्रतिशत पर बरकरार रख कर इस आशंका पर मुहर लगा दी है।
पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क भी पहले की तरह 14.35 रुपए और 4.60 रुपए प्रति लीटर पर रहेगा। तेल कंपनियां ने पेट्रोल के दामों में दो से चार रुपये की बढ़तोरी के लिए कमर कस ली है। कयास लगाया जा रहा था कि देश में तेल के दामों वृद्धि नहीं हो, इसके लिए वित्त मंत्री सीमा और उत्पाद शुल्क में कुछ कमी की घोषणा कर सकते हैं, लेकिन प्रणब मुखर्जी ने अपने बजट में इस दिशा में कोई कदम ना उठाकर ना सिर्फ तेल कंपनियों को झटका दिया बल्कि आम आदमी का भरोसा भी तोड़ा है।
सरकारी क्षेत्र की प्रमुख तेल इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन का कहना है कि कच्चे तेल के बढ़ते दामों की वजह से पेट्रोल की कीमतों में वृद्घि करना जरूरी हो गया है। उल्लेखनीय है कि पिछले साल जून से ही सरकार ने पेट्रोल के दाम को बाजार हवाले छोड़ दिए थे। अब अगर अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ते हैं तो उसके अनुरूप तेल कंपनियां भी पेट्रोल की कीमतें बढ़ा सकती है। इस नियम के तहत तेल कंपनियों को अब पेट्रोल का खुदरा दाम बढ़ाने के लिए सरकार से अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी।












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