संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से लीबिया निलंबित

वहीं संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद भी न्यूयॉर्क में बैठक कर रही है. कूटनयिकों का कहना है कि फ़्रांस और ब्रिटेन ने एक मसौदा तैयार किया है जिसमें प्रस्ताव रखा गया है कि कैसे लीबिया के राजनीतिक और सैन्य लोगों को अलग-थलग किया जाए. इसमें संपत्ति फ़्रीज़ करना, यात्राओं पर पाबंदी और हथिायरों की ख़रीद-फ़रोख़्त पर प्रतिबंध की बात शामिल है.
नैटो की बैठक
बीबीसी संवाददाता ब्रिजेट केंडल के मुताबिक मानवाधिकार परिषद ने ऐसी माँग पहले कभी नहीं मानी है. संवाददाता का कहना है कि आमतौर पर मानवाधिकार परिषद पश्चिमी देशों की ऐसी बातें कम ही मानती हैं जिसमें अलोकतांत्रिक शासनों को अलग-थलग करने की बात हो. अमरीकी कूटनयिकों ने भी संकेत दिए हैं कि अमरीका भी ऐसा ही कुछ चाहता है.
अगर सुरक्षा परिषद ब्रिटेन और फ़्रांस के प्रस्ताव को मंज़ूर कर लेता है तो कर्नल गद्दाफ़ी और उनके सहयोगी मुश्किल में पड़ सकते हैं. मानवता के ख़िलाफ़ अपराधों के आरोप में इन लोगों को अंतरराष्ट्रीय आपराधिक कोर्ट भी भेजा जा सकता है.हालांकि इसमें कुछ समय लग सकता है. रूस और चीन इसमें देरी कर सकते हैं.
वहीं नैटो के दूतों की ब्रसेल्स में आपात बैठक हुई है जिसमें नागरिकों को लीबिया से हटाने पर चर्चा हुई है.नैटो ने कहा है कि वो स्थिति पर नज़र रखे हुए है. इस बात पर भी विचार हुआ कि अगर गद्दाफ़ी अपने ही लोगों पर बमबारी करते हैं तो क्या नैटो लीबियाई हवाईक्षेत्र पर गश्त लगा सकता है. इस पर नैटो ने कहा है कि इसके लिए संयुक्त राष्ट्र की अनुमति चाहिए होगी.
कुछ विशेषज्ञों को आशंका है कि इससे सैन्य टकराव की स्थिति आ सकती है. हालांकि कूटनयिक मानते हैं कि इस विकल्प पर बाद में विचार किया जा सकता है.












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