'छत्तीसगढ़ के पत्रकार की हत्या जाँच CBI करे'

Raman Singh

सलमान रावी, बीबीसी संवाददाता, रायपुर

छत्तीसगढ़ सरकार ने बिलासपुर के पत्रकार सुशील पाठक की हत्या का मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई को सौंपने की अनुशंसा की है. अधिकारियों का कहना है कि इस बाबत शुक्रवार को राज्य सरकार की तरफ़ से एक औपचारिक पत्र केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेज दिया गया है. इससे पहले गुरुवार को मुख्यमंत्री रमन सिंह ने छत्तीसगढ़ विधान सभा में विपक्ष को आश्वासन दिया था कि पाठक के हत्यारों को बख्शा नहीं जाएगा.

पिछले दो महीनों के दौरान छत्तीसगढ़ में दो पत्रकारों की हत्या कर दी गई है जबकि कुछ पत्रकारों को जान से मारने की धमकी मिली है. नक्सलियों और सुरक्षा बलों के बीच चल रहे संघर्ष का केंद्र माने जाने वाले छत्तीसगढ़ में पत्रकार वैसे तो पहले से ही अपने आप को असुरक्षित महसूस कर रहे थे मगर अब वह अपराधियों के निशाने पर भी आ गए हैं.

असुरक्षा की भावना

दिसंबर और जनवरी महीनों में लगातार दो पत्रकारों की अपराधियों ने हत्या कर पुलिस तंत्र को एक बड़ी चुनौती दी है. यह दोनों ही पत्रकार दो प्रमुख अखबारों के लिए काम करते थे. दिसंबर महीने में राज्य के बिलासपुर शहर में दैनिक भास्कर के पत्रकार सुशील पाठक की हत्या तब कर दी गई थी जब वह देर रात काम से अपने घर लौट रहे थे.उनके घर के पास पहले से घात लगाकर बैठे अपराधियों नें उनकी गोली मारकर हत्या कर दी थी.

ठीक एक महीने के बाद रायपुर से लगभग सौ किलोमीटर दूर छुरा इलाके में नई दुनिया के लिए काम करने वाले उमेश राजपूत को भी इसी तरह मार दिया गया. इससे पहले दंतेवाड़ा के तीन पत्रकारों को एक संगठन नें डंके कि चोट पर जान से मारने की धमकी दी थी. इन सभी वारदातों के बाद अब पत्रकारों में एक अजीब से खौफ का माहौल है.

शुक्रवार को रायपुर के बूढा तलाव इलाके में पत्रकारों नें धरना देकर दोनों पत्रकारों की हत्या की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की. पत्रकारों पर बढ़ रहे हमलों के बारे में चर्चा करते हुए वरिष्ठ पत्रकार मोहसिन अली सुहैल का कहना था कि शहरी इलाकों में जब पत्रकारों के बीच इतनी असुरक्षा की भावना है तो कस्बाई इलाकों में हालात का सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है.

इन घटनाओं के खिलाफ़ हाल ही में पत्रकारों ने बिलासपुर में भी धरने दिए और अधिकारियों से मिलकर सुरक्षा की गुहार भी लगाई. रायपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष अनिल पुस्सद्कर मानते हैं कि अविभाजित मध्य प्रदेश में पत्रकार ज़्यादा सुरक्षित थे.

उनका कहना है,"जब से छत्तीसगढ़ अलग हुआ है, पत्रकारों पर हमले बढ़ गए हैं. कहीं अपराधियों का डर तो कहीं शासन के लोगों द्वारा प्रताड़ित किया जाता है.वैसे तो पत्रकार अपनी जान हथेली पर रख कर काम करते हैं मगर जब उनके साथ कोई घटना घट जाती है तो उनके संस्थान उनसे मुंह मोड़ लेते हैं. शुक्रवार को भी पत्रकारों ने राज्य के मुख्यमंत्री रमन सिंह से मुलाक़ात कर सुरक्षा की गुहार लगाई है. पत्रकारों का कहना है कि मौजूदा माहौल में काम करना उनके लिए काफी मुश्किल हो गया है. लगातार हो रहे हमलों से छत्तीसगढ़ के पत्रकारों में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है.

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