स्कूलों से हटेंगे सुरक्षाकर्मी

सलमान रावी
बीबीसी संवाददाता, रायपुर
छत्तीसगढ़ में माओवादियों ने सैकड़ों स्कूली भवनों को तोड़ डाला है
छत्तीसगढ़ सरकार का कहना है कि वह अगले चार महीनों के भीतर सुरक्षाबलों को सभी स्कूलों से हटा लेगी.
इसके लिए राज्य के बजट में अलग से प्रावधान किए जा रहे हैं.
सरकार का कहना है जिन इलाकों में स्कूलों में सुरक्षा बलों के जवानों को रखा गया है वहाँ अलग से बैरक बनाए जा रहे हैं ताकि राज्य और केंद्रीय सशस्त्र बलों के जवानों को उसमे स्थानांतरित कर दिया जाए. यह काम जून महीने तक पूरा कर लिया जाएगा.
इस मामले को लेकर छत्तीसगढ़ की सरकार की सर्वोच्च न्यायालय में भी काफी फजीहत हो चुकी है.
सर्वोच्च न्यायालय नें भी सरकार से इस संबंध में अलग से शपथ पत्र दायर करने को कहा था.
अदालत राज्य सरकार से यह जानना चाह रही थी कि कबतक छत्तीसगढ़ में सलवा जुडूम के कैंप बंद कर दिए जाएँगे और कब तक स्कूलों से सुरक्षा बलों को हटा लिया जाएगा.
सामाजिक कार्यकर्ता नंदिनी सुंदर और पीयूसीएल द्वारा दायर एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने सरकार से 30 मार्च तक स्थिति स्पष्ट करने को कहा है.
नक्सल समस्या का दंश बच्चों के इस स्कूल को झेलना पड़ रहा है
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमण सिंह ने स्पष्ट किया है कि चार महीने के भीतर सुरक्षा बलों को स्कूलों से हटाने का काम पूरा कर लिया जाएगा.
बीबीसी से बात करते हुए उन्होंने कहा,"सरकार सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के प्रति गंभीर है और जल्द ही सभी सुरक्षा बलों को स्कूलों से हटा लिया जाएगा. इसके लिए अलग से बैरक भी बनाए जा रहे हैं."
मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच ने भी झारखण्ड और छत्तीसगढ़ में स्कूलों में सुरक्षा बलों की मौजूदगी पर चिंता ज़ाहिर की है.
इन दोनों ही राज्यों में सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच चल रहे संघर्ष का सबसे बुरा दंश स्कूल जाने वाले बच्चों को झेलना पड़ रहा है.
कहीं स्कूलों में सुरक्षाबलों का कब्ज़ा है तो कहीं माओवादी स्कूली भवनों को विस्फोट से ध्वस्त कर रहे हैं.
संगठन ने माओवादियों और सरकार से अपील भी जारी कि है कि दोनों ही पक्ष स्कूलों को निशाना ना बनाएँ.
सरकार की दलील रही है कि सुदूर जंगल के इलाकों में या यूँ कहा जाए कि माओवादियों के वर्चस्व के इलाकों में स्कूल के अलावा कोई पक्का भवन नहीं है
इसलिए उन इलाकों में सुरक्षा बलों को वहीँ रखा जा रहा था.
माओवादियों के ख़िलाड़ चल रहे अब तक के सबसे बड़े अभियान यानी 'ऑपरेशन ग्रीनहंट' के तहत हज़ारों सुरक्षा बलों के जवानों ने झारखण्ड और छत्तीसगढ़ के सुदूर इलाकों में स्थित स्कूलों में ही डेरा डाल रखा है.
वहीँ माओवादियों ने भी इन दोनों राज्यों में सैकड़ों स्कूली भवनों को ध्वस्त कर डाला है.
इन इलाकों में बच्चे पेड़ के नीचे या खुले आसमान के नीचे पढने को मजबूर हैं.
उम्मीद की जा रही है कि सुरक्षा बलों के हटने से एक बार फिर वीरान पड़े स्कूल बच्चों से भर जाएँगे.












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