इंफोसिस पर लगाया वीजा धांधली का आरोप

वाशिंगटन, 26 फरवरी (आईएएनएस)। भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी कम्पनी इंफोसिस पर एक अमेरिकी नागरिक ने मुनाफा बढ़ाने के लिए वीजा और कर धांधली करने का आरोप लगाया है।

जैक पामर ने अलबामा अदालत में दाखिल शिकायत में कहा है कि इंफोसिस आव्रजन नियमों का उल्लंघन करते हुए अकुशल विदेशी कर्मचारियों को अपनी ग्राहक कम्पनियों में स्थायी तौर पर काम करने के लिए भेजती है।

इंफोसिस में अगस्त, 2008 से 'प्रिंसिपल - इंटरप्राइज सॉल्यूशंस' के तौर पर काम करने वाले पामर ने आरोप लगाया है कि कम्पनी अमेरिका में काम करने के लिए उसे भारत में वेतन देती है और इस प्रकार कर चोरी करती है। साथ ही भारत में कर्मचारी को दिए जाने वाले भुगतान से अधिक अपनी ग्राहक कम्पनियों से वसूलती है।

उन्होंने कहा कि अमेरिका में एच-1बी कार्यक्रम पर पाबंदी लगाने के बाद उन्हें बेंगलुरू में योजना बैठक में हिस्सा लेने के लिए भेजा गया। वहां एक बैठक में उनसे एच-1बी नियमों से बचने और लाभ बढ़ाने तथा शेयरों का मूल्य बढ़ाने के लिए सुझाव मांगा गया।

उन्होंने आगे कहा कि एच-1बी नियमों से बचने के लिए प्रबंधन ने बी-1 नियमों का सहारा लेने का फैसला किया।

पामर की शिकायत के मुताबिक कम्पनी ने बाद में विशेषज्ञ कर्मचारियों को निम्न आय वाली बी-1 श्रेणी में भेजना शुरू किया और उनके लिए ऊंचे वेतन वसूले।

पामर ने कहा कि इंफोसिस ने उसे धमकी भी दी है। कम्पनी में अमेरिका में 15,000 कर्मचारी काम कर रहे हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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