भारत के साथ रक्षा एवं आर्थिक सम्बंध बढ़ाएगा अमेरिका
वाशिंगटन, 26 फरवरी (आईएएनएस)। राष्ट्रपति बराक ओबामा के नवम्बर में हुए भारत दौरे के बाद की कड़ी के रूप में अमेरिका की भारत के साथ रक्षा एवं आर्थिक साझेदारी जैसे दो प्रमुख क्षेत्रों में सम्बंधों को बढ़ावा देने की योजना है।
दक्षिण एशिया के लिए प्रमुख उप सहायक सचिव जेफ्री प्येट ने अटलांटा के इमोरी यूनिवर्सिटी में शुक्रवार को आयोजित 'इमर्जिग इंडिया' शिखर बैठक में कहा कि राष्ट्रपति ओबामा के दौरे के दौरान प्रस्तावित अवसरों को आने वाले सप्ताहों एवं महीनों में फलीभूत बनाने की योजना है।
जेफ्री प्येट ने 'द रीजनल एंड ग्लोगल इम्पैक्ट ऑफ द यूएस-इंडिया स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप' विषय पर बोलते हुए कहा कि हमारे सामने दोनों देशों की सरकारों के लिए एक ऐसा एजेंडा तय करने की चुनौती है, जो उस पर आधारित होगा, जिसे हमने ओबामा और मनमोहन सिंह के बीच महत्वाकांक्षी दृष्टिकोण पर बनी सहमति के जरिए हासिल किया है।
प्येट ने रक्षा सहयोग को द्विपक्षीय साझेदारी का एक महत्वपूर्ण आधार बताया और कहा कि भारत के साथ अगले पांच वर्षो के दौरान सैन्य आधुनिकीकरण पर लगभग 45 अरब डॉलर खर्च करने की उम्मीद है। अमेरिका ने भारत को बेहतर प्रौद्योगिकी प्रस्तावित करने और अपने रक्षा सहयोग को और मजबूत करने के अवसर का स्वागत किया है।
प्येट ने कहा, "अमेरिकी प्रस्ताव भारत के अंतरिक्ष औद्योगिक आधार और रक्षा क्षमताओं को आश्चर्यजनक रूप से बदल देगा और भारत को आधुनिक प्रौद्योगिकी प्रदान करने की हमारी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करेगा।"
अमेरिका अपनी वैश्विक रणनीतिक साझेदारी की तरह भारत के साथ सरकार से सरकार के बीच आर्थिक साझेदारी बढ़ाने के लिए भी सक्रिय रूप से काम कर रहा है।
प्येट ने विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन का जिक्र करते हुए कहा, "वाशिंगटन और नई दिल्ली में हमारे सामने चुनौती यह है कि न्यूयार्क और मुम्बई में अपने निजी क्षेत्र के सहयोगियों की गति एवं महत्वाकांक्षा के साथ तारतम्य बनाए रखना।"
उन्होंने कहा, "अमेरिका-भारत आर्थिक सहयोग हमारे रूपांतरित द्विपक्षीय सम्बंध का एक वाहक है और कई मायनों में अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था में भारत के बदल रहे स्थान के पीछे का एक निर्णायक कारक भी।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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