..और पिछड़े इलाके की किशोरियां छायाकार बन गईं
भोपाल, 26 फरवरी (आईएएनएस)। मौका मिले तो सिर्फ विकसित इलाकों, शहरों व महानगरों के ही नहीं, दूरवर्ती पिछड़े इलाकों के बच्चे क्या नहीं कर सकते हैं।
तभी तो मध्य प्रदेश के एक पिछड़े इलाके की कुछ किशोरियों को जब मौका मिला तो, उनके हौसलों को जैसे पर लग गए। उन्होंने वह मुकाम हासिल कर लिया, जो उन्हें आसानी से नहीं मिल सकता था। अब वे अपनों के बीच आम से खास बन गई हैं। छायाकार!
'बस एक क्लिक' शीर्षक से तैयार की गई छायाचित्रों की पुस्तिका हर किसी का दिल जीतने वाली है। मुख्य पृष्ठ सहित 20 पृष्ठों वाली इस पुस्तिका में कुल 28 छायाचित्र शामिल हैं, हर छायाचित्र में एक संदेश छुपा बैठा है। सभी छायाचित्र उस संदेश की पुष्टि करते हैं, जिसमें कहा गया है कि एक तस्वीर हजार शब्द के बराबर होती है। इन तस्वीरों को उन किशोरियों ने उतारी है, जिन्हें चंद दिनों के प्रशिक्षण ने सफल छायाकार बना दिया है।
भिण्ड जिले की 12वीं में पढ़ने वाली जया अग्निहोत्री बताती हैं कि उन्हें फोटोग्राफी का शौक बचपन से था, मगर अवसर नहीं मिल रहा था। पहले तो लोगों ने लड़की के फोटोग्राफी सीखने पर सवाल खड़े किए, मगर अब उन्हीं से प्रोत्साहन मिलने लगा है। अब वह अपने इलाके की समस्याओं को तस्वीरों में उतार कर उन्हें सामने लाना चाहती हैं।
संगम तोमर, अंजली तोमर और नीलम उन किशोरियों में शामिल हैं, जिन्होंने अपना भविष्य फोटोग्राफी के क्षेत्र में ही तलाशने का निर्णय लिया है। इन सभी का कहना है कि फोटोग्राफी के प्रशिक्षण ने उन्हें आम से खास बना दिया है।
महिला बाल विकास विभाग व यूनिसेफ के जरिए प्रशिक्षण हासिल करने वाली किशोरियों की तस्वीरों का संग्रह तैयार किया गया है। संग्रह का शनिवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विमोचन किया। इस मौके पर यूनिसेफ की मध्य प्रदेश प्रभारी तान्या गोल्डनार, महिला बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव बी. आर. नायडू, यूनिसेफ के संचार अधिकारी अनिल गुलाटी आदि मौजूद थे।
ग्वालियर-चंबल का इलाका मध्य प्रदेश के पिछड़े इलाकों में आता है। किसी समय इस इलाके की पहचान डकैतों के अभयारण्य के तौर पर रही है। इतना ही नहीं ग्वालियर, भिण्ड व मुरैना में लिंगानुपात व लिंग भेद अहम समस्या भी है। इस इलाके की किशोरियों को फोटोग्राफी का प्रशिक्षण देना, महिला बाल विकास विभाग व यूनिसेफ द्वारा लिया गया एक चुनौतीपूर्ण निर्णय था। तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में 29 किशोरियों को फोटोग्राफी की कला सिखाई गई।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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