उड़ीसा : शाम तक हो सकती है जिलाधिकारी की रिहाई (लीड-1)
राज्य के मुख्य सचिव बी.के. पटनायक ने यहां संवाददाताओं से कहा, "मध्यस्थों ने नक्सलियों से लिए गए निर्णय का सम्मान करने का अनुरोध किया है और 48 घंटे के अंदर जिलाधिकारी को रिहा किए जाने की मांग की है।"
गृह सचिव यू.एन. बेहरा का कहना है, "हमें उम्मीद कर रहे हैं कि शाम तक कुछ न कुछ सकारात्मक होना चाहिए।"
राज्य के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "सरकार अपनी ओर से किसी कैदी को रिहा नहीं कर सकती। जमानत के लिए प्रयास करना होगा और उस पर निर्णय लेने का अधिकार अदालत के पास है।"
सूत्रों के मुताबिक नक्सली नेताओं के वकीलों की ओर से दायर की जाने वाली जमानत याचिकाओं पर शायद सरकारी वकील विरोध नहीं करेंगे।
नक्सलियों ने जूनियर इंजीनियर पबित्र मोहन माझी को बुधवार को रिहा कर दिया था। माझी को जिलाधिकारी कृष्णा के साथ ही 16 फरवरी को नक्सलियों ने अगवा कर लिया था। सरकार द्वारा नक्सलियों की 14 मांगे मानने के बाद माझी को रिहा किया गया था।
सरकार से बातचीत करने के लिए नक्सलियों की ओर से नियुक्त किए गए मध्यस्थ जी. हरगोपाल ने कहा, "जिलाधिकारी की रिहाई के लिए उन्होंने कुछ नई शर्ते रखी हैं। नई शर्तो को मानना हमारे लिए सम्भव नहीं होगा।"
एक अन्य मध्यस्थ दंडपाणि मोहंती ने कहा, "वे चाहते हैं कि मध्यस्थ मलकानगिरी जिले का दौरा करें। नई शर्ते हमारे लिए स्वीकार करने योग्य नहीं हैं। तय समयसीमा के मुताबिक हमने उनसे जिलाधिकारी को रिहा करने की अपील की है।"
नक्सलियों ने अपने नेताओं गांति प्रसादम, पद्मा और श्रीनिवास श्रीरामुलू की रिहाई की मांग की थी। वे आशुतोष, शोभा, तपन मिश्रा, गणनाथ पात्रा, ईश्वरी, सरिता और गोकुल कुलदीपिया सहित अन्य प्रमुख नक्सली नेताओं की भी रिहाई चाहते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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