सेना का विशेषाधिकार कानून वापस लिया जाए : नेशनल कांफ्रेंस (लीड-1)
जम्मू, 19 फरवरी (आईएएनएस)। जम्मू एवं कश्मीर में अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की आलोचना का सामना कर रहे सत्ताधारी नेशनल कांफ्रेंस ने शनिवार को स्पष्ट किया कि वह चाहती है कि राज्य में लागू सशस्त्र बल (विशेषाधिकार) अधिनियम (एएफएसपीए) हटा लिया जाए।
पार्टी ने साथ ही कहा कि वह राज्य में 'शांति विरोधियों' का मुकाबला करेगी, भारत-पाकिस्तान वार्ता को बेहतर दिशा में आगे बढ़ाने के लिए जोर देगी और कश्मीर पर भ्रम की स्थिति को समाप्त करने की कोशिश करेगी।
कई महीनोंे बाद हुई पार्टी की केंद्रीय कार्यसमिति की बैठक में नेताओं ने शनिवार को स्पष्ट संकेत दिया कि राज्य की सभी तरह की समस्याओं को दूर करने की कोशिश की जाएगी।
पार्टी मुख्यालय में शुरू हुई बैठक में पार्टी अध्यक्ष और केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री फारूख अब्दुल्ला और राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी मौजूद थे।
पार्टी केंद्रीय कार्यसमिति की यहां हुई बैठक के बाद पार्टी अध्यक्ष फारूख अब्दुल्ला ने संवाददताओं से कहा, "एएफएसपीए को रद्द किया जाएगा, क्योंकि इससे सुरक्षा व्यवस्था में कोई कमी नहीं आएगी।"
चार घंटे से अधिक समय तक चली बैठक में पंचायत चुनाव, बेरोजगारी और एएफएसपीए को रद्द किए जाने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई।
ज्ञात हो कि एएफएसपीए को रद्द नहीं किए जाने के कारण नेशनल कांफ्रेंस विपक्षी पीडीपी की आलोचना का शिकार बनता रहा है।
संवाददाता सम्मेलन में मौजूद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा, "राज्य में सुरक्षा स्थिति का अंदाजा लगाने सहित सभी दृष्टियों से विचार करने के बाद ही फैसला किया जाएगा।"
नेशनल कांफ्रेंस के नेताओं ने कहा कि वे राज्य में पंचायत चुनाव कराने के प्रति वचनबद्ध हैं।
सत्ताधारी नेशनल कांफ्रेंस (एनसी) राज्य में 'शांति विरोधियों' का मुकाबला करेगी, भारत-पाकिस्तान वार्ता को बेहतर दिशा में आगे बढ़ाने के लिए जोर देगी और कश्मीर पर भ्रम की स्थिति को समाप्त करने की कोशिश करेगी।
सूत्रों ने कहा कि बैठक में सामूहिक रूप से राज्य में पार्टी को मजबूत करने और शांति विरोधियों का मुकाबला करने का फैसला किया गया।
फारूख अब्दुल्ला ने बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच वार्ता की प्रक्रिया शुरू होने से नए अवसर का निर्माण हुआ है। यह एक अच्छा संकेत है।
उन्होंने कहा कि पार्टी भारत-पाकिस्तान की सतत् वार्ता का समर्थन करती रहेगी साथ ही केंद्र सरकार से अनुरोध करेगी कि वह जम्मू एवं कश्मीर के सभी पक्षों से बातचीत करे और बातचीत में उन पक्षों को भी शामिल करे जिन्होंने अब-तक बातचीत में शामिल होने से इंकार किया है।
उल्लेखनीय है कि मुख्य विपक्षी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) भी जल्द ही एक रणनीतिक बैठक करने जा रही है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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