2जी स्पेक्ट्रम घोटाला : शौरी सीबीआई के समक्ष पेश होंगे
एक अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, "शौरी 21 फरवरी को सीबीआई के समक्ष पेश होंगे।" राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) शासन के दौरान शौरी दूरसंचार मंत्री थे।
उन्होंने बताया कि इस सिलसिले में शौरी को सम्मन जारी नहीं किया गया है लेकिज जांच एजेंसी ने 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाला मामले में चली रही छानबीन में उनसे सहयोग मांगा है।
अधिकारी ने बताया कि शौरी से 'पहले आओ, पहले पाओ' की नीति पर लाइसेंस जारी करने के बारे सवाल पूछे जा सकते हैं। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल वर्ष 2001 में यह नीति शुरू की गई थी।
सीबीआई ने 'यूनिवर्सल एक्सेस सर्विस लाइसेंस' (यूएएसएल) को लेकर एजेंसी की चल रही प्रारंभिक जांच में पूछताछ के लिए तत्कालीन संचार मंत्री से सम्पर्क किया है।
अधिकारी के अनुसार जांच एजेंसी दिवंगत भाजपा नेता प्रमोद महाजन सहित पूर्व संचार मंत्री शौरी और दयानिधि मारन द्वारा आयोजित बैठकों का विधिवत अध्ययन करना चाहती है।
सीबीआई के मुताबिक 'पहले आओ, पहले पाओ' की नीति पर तकरीबन 50 लाइसेंस जारी किए गए और इसका लाभ उठाने वालों में भारती, वोडाफोन और आइडिया जैसी दूरसंचार कम्पनियां शामिल हैं।
सर्वोच्च न्यायालय की इस सिलसिले में छानबीन को और विस्तार देने सम्बंधी निर्देश के बाद सीबीआई ने शौरी को पेश होने को कहा है।
इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने भाजपा के नेतृत्व वाली राजग और कांग्रेसनीत संयुक्त प्रगतिशील (सप्रंग) सरकार के कार्यकाल वर्ष 2001 से 2007 के दौरान जारी किए गए टेलीकॉम लाइसेंस के बारे में पूछताछ करने का भी निर्देश दिया था।
उल्लेखनीय है कि शौरी ने गुरुवार को कहा था कि उन्होंने पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा की देखरेख में 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन में भ्रष्टाचार को लेकर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ ही सीबीआई को अगाह किया था।
भाजपा नेता ने यह भी दावा किया है कि उन्होंने जांच एजेंसी को इस मामले से जुड़े एक शख्स के बारे में बताया था। शौरी ने कहा, "मैंने वर्ष 2009 में प्रधानमंत्री से कहा था कि अगर वह अपने मुख्य सचिव टी.के.ए. नैयर से मिल सकेंगे तो, उन्हें इस सिलसिले में पूरा विवरण मुहैया करा देंगे।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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