राम जन्मभूमि परिसर में ही बनेगा मंदिर : विहिप
विहिप के केंद्रीय मार्गदशक मंडल की बैठक में पारित प्रस्ताव में कहा गया कि "आज जिस स्थान पर श्रीरामलला विराजमान हैं, वही स्थान श्रीराम की जन्मभूमि है, इसलिए मंदिर वहीं बनेगा। इस सत्य को उच्च न्यायालय ने भी स्वीकार किया है।"
प्रस्ताव पश्चिम बंगाल से आए महंत देवानंद ब्रह्मचारी ने रखा, जिसका अनुमोदन महंत नृत्यगोपाल दास (अयोध्या) ने किया। बैठक में संतों ने कहा कि लखनऊ उच्च न्यायालय की इलाहाबाद पीठ ने राम जन्मभूमि का एक तिहाई भाग मुस्लिम समाज को देने का जो निर्णय दिया है, वह कदापि स्वीकार्य नहीं है।
बैठक में कहा गया कि भारत सरकार द्वारा अधिग्रहीत 70 एकड़ भूमि श्रीराम की क्रीड़ा भूमि, लीला भूमि और संस्कार भूमि है और इस समस्त भूमि पर स्वामित्व (मालिकाना हक) मात्र विराजमान रामलला का है।
विहिप के केंद्रीय मार्गदशक मंडल के सदस्यों ने कहा कि श्रीराम जन्मस्थान सहित अधिग्रहीत पूरे परिसर में श्रीराम का भव्य मंदिर तथा उनकी कथा स्मृति का केंद्र बनेगा एवं उसी प्रारूप का मंदिर बनेगा, जैसा जनवरी, 1989 में प्रयागराज के कुम्भ मेला में ब्रह्मर्षि देवराहा बाबा के सान्निध्य में देशभर से आए हजारों धर्माचार्यो तथा संत महापुरुषों ने स्वीकार किया था।
वक्ताओं ने कहा कि विराजमान श्रीरामलला एवं उनका जन्मस्थान दोनों ही स्वयं में देवता हैं तथा इसी रूप में हिंदू समाज इस स्थान की पूजा तथा परिक्रमा करता रहा है। 135 फुट लम्बे तथा 100 फुट चौड़े इस स्थान की परिक्रमा इसकी दिव्यता का सूचक है। इसलिए देवता स्वरूप जन्म स्थान को विभाजित कर एक तिहाई भाग मुस्लिम समाज को देने का जो निर्णय उच्च न्यायालय ने दिया है, वह स्वीकार्य नहीं है।
उन्होंने कहा कि अयोध्या हिंदुओं का पवित्रतम तीर्थ क्षेत्र एवं सप्तपुरियों में प्रथम पुरी है। इसलिए अयोध्या की सांस्कृतिक सीमा में किसी नई मस्जिद का निर्माण नहीं होगा।
वक्ताओं ने याद दिलाया कि भारत सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में सितम्बर 1994 में शपथपूर्वक कहा था कि यदि यह सिद्ध हुआ कि "इस स्थान पर पहले कभी हिंदू मंदिर था तो भारत सरकार हिंदू भावनाओं के अनुरूप कार्य करेगी।" इसलिए भारत सरकार न्यायालय का सम्मान करते हुए अपने शपथ पत्र के अनुसार कार्य करे।
बैठक में कहा गया कि केंद्र सरकार सोमनाथ मंदिर की तरह श्रीराम जन्मभूमि के सम्बन्ध में भी संसद में कानून बनाकर सम्पूर्ण अधिग्रहीत भूमि रामलला को सौंपे और मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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