अप्रवासियों से ब्रितानी सर्वाधिक चिंतित

ब्रितानी हालांकि चाहते हैं कि विदेशी डॉक्टर और नर्सें ज़्यादा संख्या में आएं
एक अंतरराष्ट्रीय सर्वेक्षण से पता चला है कि ब्रितानी लोग अप्रवासन से सबसे अधिक चिंतित होते हैं.
यह सर्वेक्षण आठ यूरोपीय और उत्तर अमरीकी देशों में किया गया.
इसमें हर देश के एक-एक हज़ार लोगों की राय ली गई. इसमें पता चला कि ब्रिटेन में 23 प्रतिशत लोग मानते हैं कि अप्रवासन देश की सबसे बड़ी समस्या है.
जबकि यूरोपीय संघ और अमरीका में सिर्फ़ 10 प्रतिशत लोग इसे लेकर चिंतित होते हैं.
जिन देशों में ये सर्वेक्षण हुआ है उनमें से पाँच देशों में आबादी का एक बड़ा हिस्सा अप्रवासियों का ही है.
यह सर्वेक्षण अमरीका के 'जर्मन मार्शल फंड ' की ओर से करवाया गया.
सर्वेक्षण अमरीका, कनाडा, ब्रिटेन, फ़्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड्स और स्पेन में करवाया गया.
इस अध्ययन के अनुसार 59 प्रतिशत ब्रितानी लोगों ने कहा कि वे मानते हैं कि अप्रवासी लोगों की संख्या बहुत अधिक है.
ज़ाहिर है कि ऐसा मानने वालों की सबसे बड़ी संख्या ब्रितानियों की ही है.
जर्मनी और नीदरलैंड्स दोनों ही देश में ऐसा मानने वालों की संख्या सिर्फ़ 27 प्रतिशत थी जबकि इन दोनों ही देशों में रह रहे विदेशियों की संख्या सबसे अधिक है.
एक चौथाई ब्रितानियों का कहना था कि अप्रवासियों को नेशनल हेल्थ स्कीम (एनएचएस) और सरकारी स्कूलों का भी लाभ नहीं मिलना चाहिए.
जबकि दूसरे देशों में ऐसा कहने वालों की संख्या एक से पाँच प्रतिशत तक थी.
सबसे अधिक संख्या में ब्रितानियों ने ही कहा कि अप्रवासियों ने आकर स्थानीय लोगों की नौकरियाँ भी ले ली हैं.
हालांकि ऐसा मानने वालों की संख्या तीन चौथाई थी कि सरकार को और ज़्यादा विदेशी डॉक्टरों और नर्सों को देश में आने की इजाज़त देनी चाहिए और आधे लोगों ने कहा कि बुजुर्गों की देखभाल के लिए और अधिक विदेशी कर्मियों को देश में आने देना चाहिए.
ब्रिटेन के 70 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उनकी सरकार अप्रवासन को नियंत्रित करने के लिए ठीक तरह से काम नहीं कर रही है. हालांकि ऐसा मानने वाले सबसे अधिक (73 प्रतिशत) लोग अमरीकी थे.
'जर्मन मार्शल फंड ' के प्रमुख क्रेग डेनियल ने कहा है कि सर्वेक्षण के नतीजे सरकारों के लिए चेतावनी की तरह हैं.
उन्होंने कहा, "अप्रवासन की नीति में क्या कारगर है और क्या नहीं इसे लेकर अमरीकियों और यूरोपीय लोगों की राय स्पष्ट है."
उनका कहना है कि इस सर्वेक्षण से यह भी स्पष्ट हो गया है जहाँ जितने अधिक लोग अप्रवासियों के संपर्क में आते हैं वो उतना ही अधिक उन्हें स्वीकार करने लगते हैं.












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