कयानी, मुशर्रफ को अदालत की अवमानना का नोटिस

अदालत ने ये नोटिस पाकिस्तान में आपात स्थिति लागू करने और तीन नवम्बर, 2007 को न्यायाधीशों को बर्खाश्त करने में कथित संलिप्तता के लिए जारी किए गए हैं।

पाकिस्तान के न्यायिक इतिहास में पहली बार किसी कार्यरत सेना प्रमुख को अदालत की अवमानना का नोटिस जारी हुआ है।

ज्ञात हो कि मुशर्रफ ने तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश इफ्तिखार मुहम्मद चौधरी से मतभेद के बाद विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों को दरकिनार कर तथा समाचार चैनलों के प्रसारण पर प्रतिबंध लगाते हुए आपातकाल लागू कर दिया था और न्यायाधीशों को बर्खास्त कर दिया था।

मुशर्रफ ने न्यायपालिका के लिए एक अस्थायी संवैधानिक आदेश (पीसीओ) भी जारी किया था। और सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के जो न्यायाधीश पीसीओ के तहत फिर से शपथ ग्रहण करने को राजी हुए, वही सेवा में बरकरार रह पाए थे।

इन न्यायाधीशों में तत्कालीन नवनियुक्त प्रधान न्यायाधीश अब्दुल हमीद डागर शामिल थे। इन न्यायाधीशों ने भी आपातकाल और न्यायाधीशों की बर्खास्तगी को वैध ठहराया था, जबकि न्यायमूर्ति चौधरी सहित अन्य न्यायाधीशों को बर्खास्त कर नजरबंद कर दिया गया था।

प्रधान न्यायाधीश के पद पर फिर से बहाल होने के बाद न्यायमूर्ति चौधरी ने तीन नवम्बर के इस आदेश को स्वत: संज्ञान में लिया और आपातकाल लागू करने हेतु लिए गए सभी निर्णयों को अवैध घोषित कर दिया।

जिन न्यायाधीशों ने पीसीओं के तहत शपथ ली थी, उनकी छुट्टी कर दी गई और उन्हें अपने नाम के आगे पूर्व न्यायाधीश या पूर्व प्रधान न्यायाधीश लिखने पर भी रोक लगा दी गई।

इन न्यायाधीशों ने जब लिखित माफी मांगी तो अदालत ने उन्हें माफ कर दिया। लेकिन डागर सहित 11 न्यायाधीशों ने इस मामले के खिलाफ अदालत जाने का निर्णय लिया। मामले की सुनवाई एक वर्ष से अधिक समय से चल रही है और फैसला बुधवार को सुनाया गया।

डॉन टीवी के अनुसार, "सर्वोच्च न्यायालय ने पीसीओ न्यायाधीशों की याचिका खारिज कर दी और उन्हें अवमानना का नोटिस जारी करने का आदेश दे दिया, साथ ही मुशर्रफ, शौकत अजीज, कयानी और उस समय कार्यरत अन्य जनरलों को भी अवमानना का नोटिस जारी करने का आदेश दे दिया।"

अदालत ने पीसीओ न्यायाधीशों को 12 फरवरी को तलब किया है और घोषणा की है कि उन पर अदालत की अवमानना का मुकदमा चलाया जाएगा।

सर्वोच्च न्यायालय बार एसोसिएशन की अध्यक्ष, आस्मा जहांगीर ने हालांकि इस फैसले पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा, "सम्भवत: दुनिया में यह पहला उदाहरण है, जहां अदालत अपने ही न्यायाधीशों के खिलाफ अवमानना का मुकदमा चलाएगी।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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