आखिर क्या है लोक लेखा समिति यानी पीएसी

नई दिल्ली। सुबह से हर जगह खबर चल रही है कि पीएम मनमोहन सिंह पीएसी के समक्ष पेश होने के तैयार है। दिमाग में कौंध रहा था कि आखिर ये पीएसी बला क्या है? सोचा कि मेरे जैसे और भी कई लोग होंगे जो ये जानना चाहते होंगे तो चलिए हम बताते है कि क्या है ये पीएसी।

संसद के कार्यों में विविधता तो है, साथ ही उसके पास काम की अधिकता भी रहती है। चूंकि उसके पास समय बहुत सीमित होता है, इस‍लिए उसके समक्ष प्रस्‍तुत सभी विधायी या अन्‍य मामलों पर गहन विचार नहीं हो सकता है। अत: इसका बहुत-सा कार्य समितियों द्वारा किया जाता है। संसद के दोनों सदनों की समितियों की संरचना कुछ अपवादों को छोड़कर एक जैसी होती है। इन समितियों में नियुक्ति, कार्यकाल, कार्य एवं कार्य संचालन की प्रक्रिया कुल मिलाकर करीब एक जैसी ही है और यह संविधान के अनुच्‍छेद 118 (1) के अंतर्गत दोनों सदनों द्वारा निर्मित नियमों के तहत ही काम करती है।

सामान्‍यत: ये समितियां दो प्रकार की होती हैं - स्‍थायी समितियां और तदर्थ समितियां। स्‍थायी समितियां प्रतिवर्ष या समय-समय पर निर्वाचित या नियुक्‍त की जाती हैं और इनका कार्य कमोबेश निरंतर चलता रहा है। तदर्थ समितियों की नियुक्ति जरूरत पड़ने पर की जाती है तथा अपना काम पूरा कर लेने और अपनी रिपोर्ट पेश कर देने के बाद वे समाप्‍त हो जाती हैं।

स्‍थायी समितियां लोकसभा की स्‍थायी समितियों में तीन वित्तीय समितियों, यानी लोक लेखा समिति, प्राकक्‍लन समिति तथा सरकारी उपक्रम समिति का । विशिष्‍ट स्‍थान है और ये सरकारी खर्च और निष्‍पादन पर लगातार नजर रखती हैं। लोक लेखा समिति तथा सरकारी उपक्रम समिति में राज्‍य सभा के सदस्‍य भी होते हैं, लेकिन प्राक्‍कलन समिति के सभी सदस्‍य लोकसभा से होती हैं। समिति इस बारे में भी सुझाव देती है कि प्राक्‍कलन को संसद में किस रूप में पेश किया जाए।

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