अटल बिहारी बाजपेयी : एक महान कवि या सफल राजनेता
प्रारंभिक जीवन
अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को हुआ है वे भारत के पूर्व प्रधान मंत्री हैं। वह भारतीय जनसंघ की स्थापना करने वालों में से एक है और1968 से 1973 तक वह उसके अध्यक्ष भी रहे थे। वह जीवनभर भारतीय राजनीति में सक्रिय रहे। उन्होने लम्बे समय तक राष्ट्रधर्म, पांचजन्य और वीर अर्जुन आदि राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत पत्र-पत्रिकाओं का सम्पादन किया। इसके अतिरिक्त वे एक ओजस्वी एवं पटु वक्ता एवं प्रसिद्ध हिन्दी कवि भी हैं। वे अविवाहित हैं।
उत्तर प्रदेश के आगरा जनपद के प्राचीन स्थान बटेश्र्वार में अटल जी का का जन्म हुआ था। पिता पं. कृष्ण बिहारी मिश्र ग्वालियर में अध्यापन कार्य करते थे। अटल जी की बी.ए. की शिक्षा ग्वालियर के विक्टोरिया कालेज (वर्तमान में लक्ष्मीबाई कालेज) में हुई। कानपुर के डी.ए.वी. कालेज से राजनीति शास्त्र में प्रथम श्रेणी में एम.ए. की परीक्षा उत्तीर्ण की। फिर एल.एल.बी. की पढ़ाई शुरू की लेकिन उसे बीच में ही विराम देकर संघ कार्य में जुट गए। डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पं. दीनदयाल उपाध्याय के निर्देशन में राजनीति का पाठ पढ़ा। सम्पादक के रूप में पाञ्चजन्य, राष्ट्रधर्म, दैनिक स्वदेश और वीर अर्जुन का कार्यभार संभाला।
राजनीतिक जीवन
वह भारतीय जन संघ की स्थापना करने वालों में से एक है और 1968 से 1973 तक वह उसके अध्यक्ष भी रह चुके हैं । 1955 में पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा, सफलता नहीं मिली लेकिन, 1957 में बलरामपुर (जिला गोण्डा, उत्तर प्रदेश) से जनसंघ के प्रत्याशी के रूप में विजयी होकर लोकसभा में पहुचे। 1957 से 1977 तक ( जनता पार्टी की स्थापना तक) जनसंघ के संसदीय दल के नेता रहे। 1968 से 1973 तक वे भारतीय जनसंघ के राष्टीय अध्यक्ष पद पर आसीन रहे। मोरारजी देसाई की सरकार में वह 1977से 1979 तक विदेश मंत्री रहे और विदेशों में भारत की छवि बनाई।
1980 में जनता पार्टी से असंतुष्ट होकर इन्होंने जनता पार्टी छोड़ दी और भारतीय जनता पार्टी की स्थापना में मदद की। 6 अप्रैल, 1980 में बनी भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष पद का दायित्व श्री वाजपेयी को सौंपा गया। दो बार राज्यसभा के लिए भी निर्वाचित हुए। लोकतंत्र के सजग प्रहरी अटल बिहारी वाजपेयी ने 1997 में प्रधानमंत्री के रूप में देश की बागडोर संभाली। 19 अप्रैल, 1998 को पुनः प्रधानमंत्री पद की शपथ ली और उनके नेतृत्व में 13 दलों की गठबंधन सरकार ने पांच वर्षों में देश ने प्रगति के अनेक आयाम छुए।
सन 2004 के लोकसभा चुनावों में भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबन्धन (एण्डीए) ने वाजपेयी के नेतृत्व में चुनाव लड़ा और भारत उदय (इण्डिया शाइनिंग) का नारा दिया। इस चुनाव में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला। ऐसी स्थिति में वामपंथी दलों के समर्थन से कांग्रेस ने भारत की केन्द्रीय सरकार पर कायम होने में सफलता प्राप्त की और भाजपा विपक्ष में बैठने को मजबूर हुई। सम्प्रति वे राजनीति से सन्यास ले चुके हैं।
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