स्कूल में पढ़ाई जाती है पवित्र ग्रंथ 'गीता'

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के एक स्कूल में पिछले 75 वर्षो से छात्रों को नैतिक शिक्षा के लिए पवित्र ग्रंथ 'गीता' पढ़ाई जा रही है। राजधानी के बाबूगंज इलाके में स्थित गीता विद्यालय में यह गं्रथ नैतिक शिक्षा के लिए निर्धारित पुस्तक होने के अलावा विद्यालय के छात्रों के लिए अनिवार्य विषयों में से एक है।

गीता विद्यालय के प्राचार्य यू.पी.मिश्रा ने आईएएनएस से कहा कि 'गीता' जैसे पवित्र ग्रंथ मनुष्य को सही राह दिखाते हैं। इससे हम सीखते हैं कि किसी व्यक्ति या समाज के प्रति के हमारा व्यवहार कैसा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रों को गीता के अध्याय पढ़ाकर हम लोग एक तरह से उन्हें उनके जीवन के महत्व के बारे में बताकर जिम्मेदारियों का अहसास करा रहे हैं। मिश्रा कहते हैं, "हमें गर्व है कि इतने सालों से इस अद्वितीय परंपरा को हम जीवित रखे हुए हैं।"

स्कूल अधिकारियों के मुताबिक गीता विद्यालय की स्थापना तीन मित्रों हनुमान प्रसाद, जयप्रकाश और आर.एस कोटवाल ने सन 1395 में की थी। तीनों दोस्तों ने इस स्कूल की स्थापना शिक्षा को बढ़ावा देने के साथ-साथ बच्चों को नैतिक मूल्यों से परिपूर्ण बनाने के मकसद से की थी। धीरे-धीरे यह स्कूल लखनऊ के प्रमुख शिक्षा केंद्रों में शुमार हो गया है। न केवल अनिगनत धार्मिक नेताओं, बल्कि सरोजनी नायडू और गोविंद बल्लभ पंत जैसे नेताओं ने इस अनोखे स्कूल का दौरा किया था।

करीब 45 सालों से अधिक समय तक निजी प्रबंधन द्वारा चलाए जाने के बाद यह स्कूल उत्तर प्रदेश माध्यमक शिक्षा परिषद से सम्बद्ध हो गया और राज्य सरकार से वित्तीय सहायता का हकदार हो गया। राज्य सरकार के अधीन होने के बाद वहां नियुक्त शिक्षकों ने छात्रों के बीच गीता की पढ़ाई को जारी रखने का हरसंभव प्रयास किया।

मिश्रा कहते हैं, "शिक्षकों के सहयोग के बिना बदलते समय के साथ ऐसी परंपरा को जीवित रखना मुश्किल हो गया होता।" उन्होंने कहा कि स्कूल के पूर्व और वर्तमान दोनों शिक्षक इसके लिए बधाई के पात्र हैं। वह कहते हैं, "मुझ्झे लगता है कि स्कूल के गौरवशाली अतीत ने शिक्षकों को इस संबंध में काम करते रहने के लिए प्रेरित किया।"

उन्होंने कहा कि स्कूल के छात्रों को प्रतिवर्ष मौखिक और लिखित परीक्षा देनी होती है, जिसमें गीता के बारे में उनकी जानकारी की परख होती है। कक्षा 6 से 10 तक के इस स्कूल में वर्तमान समय में करीब 200 विद्यार्थी हैं।

स्कूल के एक शिक्षिका सविता सक्सेना ने बताया, "हम छात्रों को प्रतिदिन गीता के पांच श्लोक पढ़ाते हैं। हमारा प्रयास छात्रों को केवल श्लोक कंठस्थ कराना नहीं होता है, बल्कि हम यह भी कोशिश करते हैं कि छात्र श्लोकों का अर्थ समझझ्कर उन्हें जीवन की गतिविधियों से जोड़ सकें।"

अध्यापकों के मुताबिक छात्रों को नैतिक शिक्षा की एक लिखित परीक्षा देनी होती है, जिसमें मुख्य रूप से गीता के विभिन्न अध्यायों से तैयार 10 प्रश्न शामिल किए जाते हैं। जहां कक्षा छह से आठ के छात्रों के लिए सवाल सरल और लघु होते हैं, वहीं नौ और 10 के छात्रों को गीता के अध्यायों से सम्बंधित प्रश्नों के उत्तर वस्तुपरक ढंग से देने होते हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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