स्पेक्ट्रम आवंटन : नीतियों की समीक्षा करेगी समिति, भाजपा ने खारिज किया
नई दिल्ली। केंद्रीय दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल ने गुरुवार को सभी दूरसंचार कम्पनियों को समान अवसर उपलब्ध कराने का वादा करते हुए स्पेक्ट्रम आवंटन के नियम कितने वाजिब हैं इसकी समीक्षा के लिए एक सदस्यीय समिति बनाने की घोषणा की। सर्वोच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश शिवराज वी. पाटील समिति के अध्यक्ष होंगे। सिब्बल ने टाटा समूह के प्रमुख रतन टाटा के उस बयान का भी समर्थन किया जिसमें उन्होंने (टाटा) कहा है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने वर्ष 1999 में दूरसंचार कम्पनियों को स्पेक्ट्रम आवंटित करने के लिए पहली बार नियम में बदलाव किया, जिससे कम से कम 11 अरब डॉलर की राष्ट्रीय क्षति हुई।
इस बीच भाजपा ने नियमों की समीक्षा कराने की सिब्बल की घोषणा को खारिज करते हुए कहा कि उसे स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से जांच कराने से कम कुछ भी स्वीकार्य नहीं है।सिब्बल ने संवाददाताओं से कहा कि वह दूरसंचार विभाग द्वारा 2001 से 2009 के बीच लाइसेंस और स्पेक्ट्रम के आवंटन के लिए अपनाई गई आंतरिक प्रक्रिया की समीक्षा करना चाहते हैं।
भारतीय दूरसंचार सम्मेलन 2010 के बाद सिब्बल ने पत्रकारों से कहा, "वे (भाजपा) चुनाव (2014) के बारे में सोच रहे हैं। उन्हें दूरसंचार क्षेत्र की कोई चिंता नहीं है।" उन्होंने कहा कि वह इस क्षेत्र का विकास चाहते हैं और इसमें राजनीति नहीं चाहते।सिब्बल ने टाटा द्वारा उद्योगपति और सांसद राजीव चंद्रशेखर को लिखे पत्र पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह स्पष्ट रूप से दिख रहा है कि टाटा का बयान तथ्यपूर्ण है और इससे पता चलता है कि विपक्ष इस मुद्दे पर संसद में बहस क्यों नहीं चाहता।
2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में नया मोड़ देते हुए सिब्बल ने कहा, "रतन टाटा के पास निश्चित तौर पर पुख्ता जानकारी है जिसके आधार वह यह बात कह रहे हैं। विचारनीय बिंदु यह है कि विपक्ष और सबसे पहले भाजपा न्याय के पक्ष में नहीं है।"दूरसंचार लाइसेंस रखने वाली कंपनी बीपीएल समूह से जुड़े चंद्रशेखर द्वारा लिखे खुले पत्र का टाटा द्वारा दिए गए जवाब पर प्रतिक्रया व्यक्त करते हुए सिब्बल ने कहा, "भाजपा की रुचि केवल संसद की कार्यवाही बाधित करने में है। इस पार्टी के लिए हमें अंग्रेजी के नए शब्द को ईजाद करना होगा।"
उन्होंने कहा, "लेकिन मैंने आज जो पाया है, वह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। कुछ ऑपरेटर दूसरों से लड़ रहे हैं, क्योंकि वे महसूस कर रहे हैं कि उनके साथ भेद-भाव हुआ है।"अपने जवाब में टाटा ने कहा है कि जिस शक्ति सम्पन्न मंत्री समूह ने दूरसंचार लाइसेंस आवंटन के नियम में बदलाव किया, उसका नेतृत्व भाजपा नेता जसवंत सिंह ने किया था। नियम को बदलकर नीलामी प्रक्रिया लागू की गई जो आज भी लागू है।
सिब्बल ने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की नवीनतम रिपोर्ट के समानांतर रिपोर्ट तैयार करने की जरूरत भी बताई। कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2008 में स्पेक्ट्रम के आवंटन की सरकारी नीति के कारण देश को 58,000 करोड़ से 1.76 लाख करोड़ रुपये तक का नुकसान हुआ है। इसी रिपोर्ट के कारण ए. राजा को पिछले महीने दूरसंचार मंत्रालय छोड़ना पड़ा था।इस बीच स्पेक्ट्रम आवंटित करने के नियमों की समीक्षा कराने के सिब्बल के बयान को भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली ने खारिज कर दिया है। भाजपा नेता ने यहां कहा कि उनकी पार्टी को यह मंजूर नहीं है।
जेटली ने पत्रकारों को बताया, "2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाला इतना बड़ा है कि इसकी जांच एक संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) ही कर सकती है। इस समिति में सभी दलों के प्रतिनिधि होते हैं, फिर भी सरकार जेपीसी से जांच कराने के लिए तैयार नहीं है।"उन्होंने कहा कि सरकार ने दूरसंचार कम्पनियों को स्पेक्ट्रम आवंटित करने के नियम कितने वाजिब हैं, इसकी जांच सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश से कराने के लिए एक सदस्यीय समिति बनाने की घोषणा की है, लेकिन उनकी पार्टी सरकार के इस पहल का पुरजोर विरोध करती है।
भाजपा ने कहा है कि 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले की जांच 2001 से कराने के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत है, लेकिन पार्टी अगले वर्ष बजट सत्र में भी इस घोटाले की जांच जेपीसी से कराने के लिए सरकार पर दबाव बनाए रखेगी।भाजपा नेता एस.एस. अहलूवालिया ने यहां संवाददाताओं से कहा, "स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने कल (बुधवार) सीमा बढ़ाते हुए 2001 में लिए गए फैसले की अवधि से ही जांच कराने का निर्देश दिया है। इसका हम स्वागत करते हैं।"संसद की कार्यवाही 20वें दिन भी स्थगित होने पर पार्टी ने सुझाव दिया कि सत्र को 15 दिन और बढ़ाया जाए, ताकि लंबित विधायी कार्य पूरे हो सकें।












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