पाक ने की विकीलीक्स की निंदा

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल बासित ने बीबीसी हिंदी संवाददाता हफ़ीज़ चाचड़ से बात करते हुए कहा, “विकीलीक्स की ओर से जारी किए गए गोपनीय दस्तावेज़ में बहुत सी बातें कही गई हैं और संवेदनशील दस्तावेज़ों का इस प्रकार से सामने आना ठीक नहीं है."
पाकिस्तान की परमाणु सामग्री पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि विकीलीक्स में उस परमाणु सामग्री या ईँधन की बात हो रही है जो अमरीका ने 60 के दशक में पाकिस्तान को दिया था और पिछले कुछ सालों से उस की वापसी की बातें हो रही हैं. अब्दुल बासित ने कहा, “पाकिस्तान ने परमाणु सामग्री की वापसी को पहले ही रद्द कर दिया था. वह पाकिस्तान की संपत्ति है जिसकी वापसी का सवाल ही पैदा नहीं होता." उनके अनुसार पाकिस्तान अपनी परमाणु सामग्री पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा.
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि जिन दस्तावेज़ का सऊदी अरब से संबंध है तो उस के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता कि वह सही हैं या नहीं और इस बारे में सऊदी अरब की सरकार ही कुछ कह सकती है. सऊदी अरब और पाकिस्तान की बीच संबंधों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंधों का इतिहास है और ये संबंध हमेशा मज़बूत रहे हैं.
दूसरी ओर राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में भी विकीलीक्स की निंदा की गई है और कहा गया है कि तथाकथित लीक्स सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच ग़लतफ़हमियाँ पैदा करने के सिवा कुछ नहीं हैं. ग़ौरतलब है कि गोपनीय जानकारी सार्वजनिक करने वाली वेबसाइट विकीलीक्स ने इस बार अमरीकी दूतावासों की ओर से भेजे गए क़रीब ढाई लाख संदेशों को जारी किया है.
अमरीकी सरकार की तमाम आपत्तियों के बावजूद विकीलीक्स ने ये जानकारी सार्वजनिक की हैं. इन जानकारियों में अरब देशों का भी ज़िक्र है. इसमें यह भी कहा गया है कि सऊदी अरब के बादशाह शाह अब्दुल्लाह ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति के बारे में कहा था कि वह पाकिस्तान के विकास में सब से बड़ी रुकावट हैं.












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