वर्षा वनों को खतरे की बात अतिशयोक्तिपूर्ण
शोधकर्ताओं ने कहा कि दुनिया के ऊष्ण कटिबंधीय वन तब भी मौजूद थे जब लंबे समय पहले धरती का तापमान आज की तुलना में तीन से पांच डिग्री सेल्सियस ज्यादा था।
'साइंस जर्नल' में प्रकाशित लेख के मुताबिक शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष दिया कि ऊष्णकंटिबंधों में शुष्क और गर्म परिस्थितियां होने पर पौधों और जानवरों का विकास तेजी से होगा।
स्थानीय समाचार पत्र 'डेली मेल' के मुताबिक यह निष्कर्ष चट्टानों में दबे मिले 5.63 करोड़ साल पहले के पराग कणों के अध्ययन से निकाले गए हैं। इस समय धरती का तापमान बेहद गर्म था।
इस समय धरती के तापमान में हुई इस वृद्धि के कारण का पता नहीं चल सका है लेकिन कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि ज्वालामुखी विस्फोटों से बड़ी मात्रा में कार्बन डाई ऑक्साइड निकलने से तापमान में यह वृद्धि हुई होगी।
उन्होंने कहा कि वातावरण में कार्बन डाई ऑक्साइड जैसी गर्मी सोखने वाली गैसे बढ़ने पर वातावरण का तापमान बढ़ जाता है।
शोधकर्ताओं ने कहा कि इस गर्म माहौल के बावजूद पेड़-पौधों का तेजी से विकास होता रहा था। इस दौरान नई प्रजातियों का उद्भव भी काफी तेजी से हुआ।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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