दीवाली पर पूजन के मुहूर्त
इस साल दीवाली हम सभी के लिए कुछ खास लेकर आयी है। आखिर क्यों न हो 60 वर्ष बाद जो ऐसी दीवाली आ रही है। इस साल दो अमावस्याओं का योग है। दीवाली की अमावस्या 5 नवंबर को दोपहर 1:02 बजे से शुरू होगी और शनिवार को 10:22 बजे तक रहेगी। ऐसे में अगर हम मुहूर्त देख कर पूजन करेंगे तो उसके फल अच्छे मिलेंगे।
लखनऊ के आचार्य रामजी मिश्रा के अनुसार नरक चतुर्दशी, या रूप चौदस शुक्रवार दोपहर 1.25 बजे से लग गई है। इस दिन को हनूमान जयंती भी कहते हैं।
दीवाली की अमावस्या शुक्रवार को दोपहर बाद 1:02 बजे से शुरू होगी। दीपावली और गौवर्धन पर अमावस्या काल में पूजन लाभकारी होता है। व्यापारी वर्ग के लोग कुंभ लग्न में दोपहर बाद 1:42 से 3:07 बजे तक पूजन कर सकते हैं। गृहस्थ लोगों के लिए वृष लग्न में शाम 6:02 बजे से 7:56 बजे तक पूजन का समय है। साधना के लिए सिंह लग्न में रात को 12:33 से 2:53 बजे तक समय है। शनिवार सुबह 10:22 बजे तक पितरों के स्थान की पूजा के लिए अच्छा योग है।
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इस साल अमावस्या गोवर्धन पूजन के दिन शनिवार को 10:22 मिनट तक रहेगी। पर्व स्वाति नक्षत्र शुक्रवार के दिन शुक्र की राशि रहेगा। इस दिन सूर्य भी शुक्र की राशि में होगा। दो अमावस्या का ये विलक्षण योग 60 वर्ष बाद बन रहा है। इस योग में की जाने वाली पूजा शनि की पीड़ा से छुटकारा दिलाती है।
आमतौर पर दीवाली के दिन सायंकाल ही दीवाली पूजन होता है, लेकिन लक्ष्मी पूजन के मुहूर्त सिर्फ शाम को ही नहीं हैं। शुक्रवार को सुबह 6:47 से 10:59 बजे तक, दोपहर में 12:23 से 01:47 तक, शाम 16:35 से 17:59 तक भी लक्ष्मी पूजन के मुहूर्त हैं। हालांकि लाभ मुहूर्त 21:11 से 22:47 तक रहेगा, जबकि अमृत मुहूर्त शनिवार 00:23 बजे से सुबह 05:11 तक रहेगा रहेगा।
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