यौन प्रताड़ना से महिलाओं की सुरक्षा संबंधी विधेयक शीघ्र : तीरथ
महिला एवं बाल कल्याण विभाग के राज्यों के प्रभारी सचिवों की बैठक को सम्बोधित करते हुए तीरथ ने कहा कि कार्यस्थलों पर महिलाओं को यौन प्रताड़ना से बचाने के लिए शीघ्र ही एक विधेयक लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि बलात्कार की पीड़ितों को वित्तीय सहायता और सहारा देने की योजना पहले ही मंजूर की जा चुकी है। शीघ्र ही इसे अधिसूचित कर दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि घरेलू हिंसा से महिलाओं के संरक्षण संबंधी अधिनियम के क्रियान्वयन की समीक्षा की जायेगी। उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में इस कानून के अनुपालन के लिए स्वतन्त्र अधिकारी तैनात नहीं किए गए हैं, उनमें ये नियुक्तियां शीघ्र की जानी चाहिए।
तीरथ ने कहा कि राजीव गांधी किशोरी कन्या सशक्तीकरण योजना और सबला और इन्दिरा गांधी मातृत्व सहयोग योजना (आईजीएमएसवाई) को केंद्र सरकार की मंजूरी मिल गई है।
उन्होंने कहा कि सबला योजना का उद्देश्य 11 से 18 बर्ष की आयु की लड़कियों की आवश्यकताओं का समाधान करना है, जबकि आईजीएमएसवाई का उद्देश्य गर्भधारण और प्रसव के बाद की स्थितियों में महिलाओं के वेतन अथवा पारिश्रमिक में होने वाली हानि का आंशिक मुआवजा प्रदान करना है।
उन्होंने कहा कि सबला योजना को आगामी 19 नवम्बर से देश के 200 जिलों में प्रयोग के तौर पर शुरू किया जायेगा जबकि आईजीएमएसवाई भी शीघ्र ही लागू की जायेगी। यह योजना इसलिए शुरू की जा रही है ताकि गर्भवती महिलाएं गर्भधारण के दौरान समुचित आराम कर सकें और उनके स्वास्थ्य पर और नवजात शिशु के स्वास्थ्य पर कोई अनुचित प्रभाव न पड़े।
उन्होंने कहा कि इन दोनों योजनाओं को एकीत बाल विकास सेवाओं (आईसीडीएस) से जोड़ दिया जायेगा। आईसीडीएस छोटे बच्चों के स्वास्थ्य की देखभाल और शिक्षा से जुड़ी विश्व की सबसे बड़ी योजनाओं में से एक है।
तीरथ ने महिलाओं और बच्चों के कल्याण से जुड़ी इन योजनाओं के क्रियान्वयन में राज्यों के सहयोग के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि इसके लिए आवश्यक ढ़ांचे तैयार किये जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय देश के 44 करोड़ बच्चों के कल्याण और संरक्षण के लिए प्रतिबद्घ है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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