संकट में येदियुरप्पा सरकार, 4 मंत्री हुए बर्खास्त
बेंगलुरू। दक्षिण भारत में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पहली सरकार पर एक बार फिर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। मुख्यमंत्री बी. एस. येदियुरप्पा से असंतुष्ट लगभग 20 विधायकों ने बुधवार को राज्यपाल हंसराज भारद्वाज से मिलकर सरकार से समर्थन वापस लेने का पत्र सौंपा। सूत्रों के मुताबिक राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को 12 अक्टूबर तक विधानसभा में बहुमत साबित करने को कहा है।
इस बीच येदियुरप्पा ने राज्यपाल से समर्थन वापस लेने वाले चार मंत्रियों को मंत्रिपरिषद से बर्खास्त करने की सिफारिश की है। ये चारों मंत्री निर्दलीय विधायक हैं। इन्होंने कर्नाटक में भाजपा की पहली सरकार बनाने में मदद की थी। इसलिए इन्हें मंत्री पद से नवाजा गया था।
येदियुरप्पा ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "मैंने राज्यपाल से लघु उद्योग मंत्री शिवराज एस. तांगाडागी, वस्त्र व रेशम उद्योग मंत्री वेंकटरमनप्पा, समाज कल्याण मंत्री ए. नारायण स्वामी और युवा व जेल मामलों के मंत्री डी. सुधाकर को मंत्रिपरिषद से हटाए जाने की सिफारिश है। इन विधायकों ने मेरी सरकार पर अविश्वास जताया है।"
इन मंत्रियों को बर्खास्त करने का फैसला कैबिनेट की आपात बैठक में लिया गया। विधायकों द्वारा राज्यपाल को समर्थन वापसी का पत्र सौंपे जाने के बाद यह बैठक बुलाई गई थी। मुख्यमंत्री ने राज्यपाल को सौंपे गए समर्थन वापसी के पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले पार्टी के उन 15 विधायकों को सलाह दी कि वे पार्टी से निष्कासन सहित अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई से बचने के लिए अपने फैसले पर पुनर्विचार करें। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य की वर्तमान स्थिति पर चर्चा के लिए वे बुधवार शाम को राज्यपाल से मिलेंगे।












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