'बीटी बैंगन पर अनुशंसा में बदलाव नहीं'
नई दिल्ली, 28 सितम्बर (आईएएनएस)। केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री जयराम रमेश द्वारा देश के शीर्ष छह अकादमियों द्वारा बीटी बैंगन के पक्ष में दी गई रिपोर्ट को रद्द किए जाने के एक दिन बाद उन अकादमियों ने मंगलवार को कहा कि जीन परिवर्धित बैंगन की सीमित खेती पर की गई उनकी मुख्य अनुशंसा में उन्हें कोई बदलाव नहीं करना है।
भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के अध्यक्ष एम.विजयन ने कहा, "हमारा यह मानना है कि ड्राफ्टिंग प्रक्रिया में गड़बड़ी पकड़े जाने से हमारी मुख्य अनुशंसा अप्रभावित रहेगी। महत्वपूर्ण यह है कि बच्चे को नहलाने के बाद उसे भी नहाने के पानी के साथ न फेंका जाए।"
रमेश ने सोमवार को कहा था कि अकादमियों की रिपोर्ट में, एक व्यक्ति आनंद कुमार का विचार ही परिलक्षित है, जिन्हें मैं बीटी बैंगन पर रोक लगाए जाने के पहले से जानता हूं तथा इसमें व्यापक वैज्ञानिक समुदाय का विचार शामिल नहीं है।
विजयन ने इसे स्वीकार किया कि एक भूल हो गई है और इसमें सुधार की आवश्यकता है।
विजयन ने कहा, "हम इस बात से सहमत हैं कि इस रिपोर्ट के लिए यह अनुचित है कि ढेर सारी सामग्री किसी दूसरे लेख से ली जाए, भले ही उसे किसी साथी विशेषज्ञ द्वारा ही क्यों न लिखी गई हो, जो कि इस समिति में शामिल हो।"
ज्ञात हो कि पर्यावरण मंत्रालय ने मार्च महीने में भारतीय विज्ञान अकादमी, भारतीय राष्ट्रीय अभियांत्रिकी अकादमी, भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी, राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान अकादमी और राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी से जीन परिवर्धित फसलों पर एक रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा था।
अकादमियों ने पिछले सप्ताह अपनी रिपोर्ट मंत्रालय को सौंप दी थी।
बीटी बैंगन के खिलाफ अभियान चलाने वाले संगठन, 'कोलिशन फॉर जीएम फ्री इंडिया' ने शनिवार को आरोप लगाया कि बीटी बैंगन पर अकादमियों की रिपोर्ट 'बीटी ब्रिंजल : अ पायनीयरिंग पुश' नामक एक लेख से ली गई है। यह लेख जैव प्रौद्योगिकी विभाग के एक प्रकाशन 'बायोटेक न्यूज' में प्रकाशित हुआ था। इसके लेखक बीटी बैंगन के प्रबल समर्थक आनंद कुमार हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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