स्कूल खुलने का ज्यादा शोर न मचाएं : उमर
ज्ञात हो कि घाटी में लंबे समय से बंद स्कूल सोमवार से खोल दिए गए हैं।
एक सरकारी कार्यक्रम के मौके पर मीडियाकर्मियों से बातचीत में अब्दुल्ला ने कहा, "आप सभी से मेरा निवेदन है कि घाटी में स्कूलों के खुलने की घटना को ज्यादा उजागर नहीं किया जाना चाहिए।" क्योंकि उन्हें इस बात का भय है कि बच्चों को इससे दिक्कत हो सकती है।
अब्दुल्ला ने कहा, "इसे ज्यादा तूल नहीं दिया जाना चाहिए, क्योंकि बच्चों की जिंदगी दांव पर है।" अब्दुल्ला का बयान ऐसे समय में आया है, जब कुछ स्कूली बसों पर घाटी में कुछ स्थानों पर पथराव करने वालों ने हमला किया है। हालांकि पुलिस ने दावा किया है कि इलाके के स्थानीय निवासियों ने खुद उपद्रवियों को दौड़ाया और उन्हें वहां से भागने के लिए मजबूर होना पड़ा।
ज्ञात हो कि पथराव और प्रदर्शनकारियों व सुरक्षाकर्मियों के बीच संघर्ष के बाद घाटी के शिक्षण संस्थान मध्य जून से ही बंद थे। केंद्र सरकार ने राज्य सरकार से कहा था कि घाटी में सामान्य स्थिति बहाल करने के आठ सूत्री पहल के रूप में स्कूलों और कॉलेजों को सोमवार से खोल दिया जाए।
इस बीच अलगाववादियों में खासतौर से कट्टरपंथी सैयद अली शाह गिलानी ने आम बंदी के दिन विद्यार्थियों के स्कूल जाने का विरोध किया है। गिलानी के विरोध कार्यक्रम के अनुसार सोमवार को आम बंदी है।
अब्दुल्ला ने सोमवार को स्कूलों के खोले जाने के निर्णय को जायज ठहराया है। उन्होंने कहा कि "सरकार बच्चों के भविष्य को नजरअंदाज नहीं कर सकती। हम हर चीज का मुआवजा दे सकते हैं, लेकिन संकट के दौरान खत्म हुई जिंदगियों और शिक्षा का मुआवजा नहीं दे सकते।"
इधर नई दिल्ली में गृह मंत्री पी.चिदम्बरम ने घाटी में स्कूलों के खोले जाने पर खुशी जाहिर की है और कहा है कि स्कूली बसों पर उपद्रवियों का पथराव शरारतपूर्ण है।
गृह मंत्रालय के अनुसार स्कूली बसों पर पथराव करने की कुछ घटनाएं घटी हैं। मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है, "हबाक, बेमिना और नौगाम में स्कूली बसों पर पथराव की कुछ मामूली घटनाएं घटी हैं।"
चिदम्बरम ने सवालिया अंदाज में कहा है, "अच्छे विचार का कोई व्यक्ति भला स्कूली बसों पर कैसे पत्थर फेंक सकता है?"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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