केंद्रीय समिति ने पोस्को के प्रस्तावित बंदरगाह स्थल का दौरा किया
पूर्व केंद्रीय पर्यावरण सचिव मीना गुप्ता की अध्यक्षता वाली इस समिति ने जगतसिंहपुर जिले में जटाधारी नदी के मुहाने वाले क्षेत्र का दौरा किया। इससे पहले सरकार ने 27 अगस्त को परियोजना से जुड़े मामलों में समिति की जांच के दायरे को बढ़ा दिया था।
जिले के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आईएएनएस से कहा कि समिति के सदस्यों ने परियोजना में पर्यावरण संरक्षण कानून, तटीय क्षेत्र विनियमन कानून और अन्य कानूनों के अनुपालन की स्थिति का जायजा लेने के लिए जटाधारी नदी के मुहाने का दौरा किया।
अधिकारी ने कहा कि समिति ने विभिन्न नियमों, कानूनों और अधिनियमों के आधार पर कंपनी को मिली मंजूरियों की शर्तो के अनुपालन का भी जायजा लिया।
सोमवार को यहां पहुंची इस समिति ने प्रदेश के वन एवं पर्यावरण विभाग के अधिकारियों से परियोजना में वन अधिकार कानून (एफआरए) के उल्लंघन के विभिन्न आरोपों पर चर्चा की।
दक्षिण कोरियाई कंपनी पोस्को ने वर्ष 2005 में पाराद्वीप बंदरगाह के निकट इस्पात संयंत्र और बंदरगाह स्थापित करने के लिए 12 अरब डॉलर के निवेश का समझौता किया था। भुवनेश्वर से करीब 100 किलोमीटर दूर इस परियोजना का निर्माण 2016 तक होना है।
इस परियोजना के लिए पोस्को को करीब 4,004 एकड़ जमीन की आवश्यकता है, जिसमें से ज्यादातर जमीन सरकारी है। परियोजना के लिए चिन्हित की गई जमीन में से 2,900 एकड़ जमीन वन क्षेत्र की है।
इस मामले में राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के सदस्य और पूर्व नौकरशाह एन. सी. सक्सेना की अध्यक्षता में पहले बनी समिति की रिपोर्ट का उड़ीसा सरकार द्वारा विरोध किए जाने के बाद पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने जुलाई में मीना गुप्ता समिति का गठन किया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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