बीएचयू रैगिंग मामला : 4 छात्र गिरफ्तार, डीन हटाए गए (राउंडअप)

गिरफ्तार चारों छात्रों पर कथित रूप से एक विकलांग छात्र के साथ रैगिंग के दौरान मारपीट करने और उसे निर्वस्त्र कर उसका अश्लील एमएमएस बनाने का आरोप है।

बीएचयू के प्रवक्ता राजेश सिंह ने शुक्रवार शाम यहां संवाददाताओं को बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पीड़ित छात्र की शिकायत पर कोई कार्रवाई न करने के आरोप में वाणज्यि विभाग के डीन विश्वंभर झा को पद से हटा दिया तथा तत्कालीन वार्डन जी.सी.आर जायसवाल को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया।

सिंह ने कहा कि बीएचयू प्रशासन ने पूरे मामले की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है, जो आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई न किए जाने के कारणों की जांच करेगी।

बीएचयू के चार छात्रों आशीष गौतम, मोहित शुक्ला, गृजेश तिवारी और अनुज लाल को कथित रूप से एक विकलांग छात्र अंकित (बदला हुआ नाम) के साथ रैगिंग के दौरान मारपीट करने और निर्वस्त्र करके उसका अश्लील एमएमएस बनाने के आरोप में गुरुवार को ही देर रात गिरफ्तार कर लिया गया था।

वाराणसी के लंका थाना प्रभारी मोहन यादव ने शुक्रवार को संवाददाताओं को बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से गुरुवार देर रात मामला दर्ज कराए जाने के बाद चारों छात्रों को गिरफ्तार किया गया। यह मामला लगभग एक साल पुराना है।

यादव ने बताया कि छह छात्रों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है। अन्य दो आरोपी छात्र बीएचयू से पास होकर निकल चुके हैं। बीएचयू लंका थाना क्षेत्र के तहत आता है।

बी.कॉम द्वितीय वर्ष के छात्र अंकित की तरफ से आरोपी छात्रों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराए जाने के लगभग एक साल बाद बीएचयू प्रशासन हरकत में आया है।

यह पूरा मामला अक्टूबर 2009 का है। पीड़ित छात्र ने शुक्रवार को संवाददाताओं से कहा, उसके सीनियर व सहपाठी छह छात्रों ने विश्वविद्यालय के बाहर ले जाकर उसकी बुरी तरह पिटाई की थी और फिर कपड़े उतारकर अश्लील एमएमएस बनाया और उसे विश्वविद्यालय के छात्रों में बंटवा दिया।

अंकित ने बताया कि शिकायत करने पर जब आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई तो, वह अपने घर बक्सर (बिहार) चला गया। घर वालों की तरफ से विश्वविद्यालय जाकर पढ़ाई जारी रखने की बात कहे जाने पर अंकित फरवरी 2010 को वापस विश्वविद्यालय लौटा।

अंकित के मुताबिक, "मैंने आरोपी छात्रों के खिलाफ कार्रवाई के लिए विभागाध्यक्ष से फिर गुहार लगाई तो मुझ्झ्झसे कहा गया कि मामला काफी पुराना हो गया है। उसके बाद छात्र मुझ्झ्झे फिर से प्रताड़ित करने लगे। मैं फिर वापस घर चला गया। उपस्थिति कम होने के कारण मैं परीक्षा में फेल हो गया।"

अंकित ने बताया, "गत नौ सितंबर को मैं वापस बीएचयू आया। जब छात्रों ने मुझे फिर प्रताड़ित करना शुरू किया तो मैंने बीएचयू प्रशासन को पत्र लिखा और कहा कि आरोपी छात्रों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो मैं जान दे दूंगा।"

बीएचयू के चीफ प्रॉक्टर एच. सी. एस. राठौर ने आईएएनएस को बताया, "निश्चित रूप से यह जांच का विषय है कि अक्टूबर 2009 में पीड़ित की तरफ से दर्ज कराई गई शिकायत पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई। आरोपी छात्रों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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