राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता बाल फिल्म पर विवाद बढ़ा
हरिकुमार ने यहां पत्रकारों से कहा, "बाल फिल्मों के खण्ड में अंतिम दौर में शिवन की फिल्म और एक कन्नड़ फिल्म (पुट्टानी पार्टी) थी। जूरी की आम राय थी कि दोनों फिल्में कोई पुरस्कार हासिल नहीं कर सकी हैं तो वे पुरस्कार की हकदार नहीं हैं।"
उन्होंने कहा, "तब एक सदस्य ने कहा था कि इन दोनों ही फिल्मों का निर्माण 'चिल्ड्रन्स फिल्म सोसायटी ऑफ इंडिया' ने किया है और केवल इसी के सहयोग से यहां इस तरह की फिल्में बनती हैं और यदि हम पुरस्कार नहीं देते हैं तो बाल फिल्मों को प्रोत्साहन देने के लिए कोई नहीं होगा।"
उन्होंने कहा, "इसके बाद कन्नड़ फिल्म को पुरस्कार देना तय किया गया। तब मैंने कहा कि यदि 'केसु' को भी पुरस्कार दिया जाता तो अच्छा होता.. इस तरह सिवान की फिल्म को पुरस्कार मिला।"
गौरतलब है कि 'केसु' हरिकुमार की एक फिल्म की रीमेक है। हरिकुमार राष्ट्रीय पुरस्कारों की जूरी में तीसरी बार शामिल हुए थे।
शिवन फिल्मकार संतोष और संजीव सिवान के पिता हैं। संजीव पुरस्कारों की क्षेत्रीय जूरी में शामिल थे इसलिए 'केसु' को पुरस्कार दिए जाने की आलोचना हुई थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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