यमुना एक्सप्रेस वे का रास्ता साफ
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उन 35 किसानों की याचिकाओं को खारिज कर दिया था, जिनकी जमीनें परियोजना के लिए अधिग्रहित की जा रही थीं। इसके साथ ही अदालत ने इस परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की राज्य सरकार की नीति को जायज ठहराया था।
किसानों का तर्क था कि चूंकि परियोजना एक निजी एजेंसी द्वारा क्रियान्वित की जानी है, लिहाजा भूमि अधिग्रहण भी उसी निजी कंपनी द्वारा किया जाना चाहिए।
उत्तर प्रदेश सरकार ने अदालत को बताया था कि परियोजना एक निजी कंपनी द्वारा जरूर क्रियान्वित की जा रही है, लेकिन यह एक्सप्रेस वे आम जनता की सुविधा के लिए है।
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति वी.एस.सिरपुरकर और न्यायमूर्ति सायरिक जोसेफ की खण्डपीठ ने बुधवार को इस मामले में अपना फैसला सुनाया।
नोएडा से शुरू होने वाला यह एक्सप्रेसवे आगरा में समाप्त होगा। यह अलीगढ़ और मथुरा से होकर गुजरेगा। इस मार्ग के तैयार हो जाने के बाद नई दिल्ली से आगरा की दूरी मात्र 90 मिनट में तय की जा सकेगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications