कनाडा में सुदर्शन को पुरस्कार
सुदर्शन टोरंटो में 20 से 25 अगस्त तक आयोजित इस प्रतियोगिता में भाग लेने वाले अकेले भारतीय थे।
प्रतियोगिता में दुनियाभर से छह कलाकारों ने हिस्सा लिया था। इनमें रूस, नीदरलैंड, कनाडा, अमेरिका, सिंगापुर और भारत के कलाकार थे। प्रत्येक प्रतियोगी ने पांच दिन तक 10 टन बालु पर काम किया था।
सुदर्शन कहते हैं, "मैंने हरियाली का संदेश देते हुए भगवान गणेश की आठ फुट ऊंची मूर्ति बनाई थी। आयोजकों की ओर से आज (बुधवार) मेरे पास एक ई-मेल संदेश आया है जिसमें बताया गया कि जनता के सबसे ज्यादा वोट हासिल करने के बाद मैंने 'पीपल्स चॉइस' पुरस्कार जीता है।"
भारत में बालु से कलाकृतियां बनाने की परंपरा की शुरुआत करने वाले सुदर्शन अब तक 42 देशों में विभिन्न प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके हैं।
उन्होंने जर्मनी के बर्लिन में आयोजित 'इंटरनेशनल सैंड स्कल्पचर फेस्टिवल' में इस साल पांचवी बार 'पीपल्स चॉइस' अवार्ड जीतकर एक रिकॉर्ड कायम किया है।
उनके काम के लिए लगातार पांच वर्ष 2006-2010 तक लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में उनका नाम रहा है।
सीएनई का आयोजन 18 दिन तक होता है। यह कनाडा का सबसे बड़ा और उत्तरी अमेरिका का पांचवा सबसे बड़ा सामुदायिक आयोजन है। इसमें औसतन 13 लाख लोग प्रतिवर्ष शामिल होते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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