कनिष्क विस्फोट : अगले सप्ताह नए सिरे से सुनवाई
वेंकूवर, 1 सितम्बर (आईएएनएस)। एयर इंडिया के कनिष्क विमान में विस्फोट के मामले में जेल की सजा काट चुके इंदरजीत सिंह रैयत के खिलाफ नौ सितंबर से इसी मामले में नए सिर से सुनवाई आरंभ होगी।
वर्ष 1985 में हुई इस जघन्य घटना के लिए महज एक आरोपी रैयत को अब तक सजा हुई है। वह बीते साल 15 वर्षो तक जेल में रहने के बाद रिहा हुआ था। इस बार दोषी करार दिए जाने पर उसे 14 साल सजा होगी।
कनाडा के शहर मांट्रियल से नई दिल्ली के लिए उड़ान भरने वाले कनिष्क विमान के यात्रियों के लिए 23 जून, 1985 का दिन उनकी जिंदगी का आखिरी दिन साबित हुआ। विमान में सवार सभी 329 लोग मारे गए थे। इनमें से अधिकांश भारतीय मूल के कनाडियाई नागरिक थे। इसी दिन टोक्यो में एयर इंडिया के एक विमान को निशाना बनाने के लिए ले जाया जा रहा बम हवाई अड्डे पर ही फट गया था जिसमें दो लोग मारे गए थे।
रैयत पेशे से मैकेनिक था और उसने स्वीकार किया था कि टोक्यो की वारदात उसकी ओर से अंजाम दी गई थी। इस मामले में वर्ष 1991 में उसे 10 साल की सजा हुई। इसके बाद कनिष्क मामले में भी उसे पांच साल की सजा हुई।
वर्ष 2003 में कनिष्क मामले के दो अभियुक्तों रिपुदमन सिंह मलिक और अजायब सिंह बागरी की शिनाख्त रैयत द्वारा की जानी थी लेकिन ऐन मौके पर वह मुकर गया। बताया गया कि रैयत ने 27 बार झूठ बोला और इस वजह मलिक व बागरी रिहा हो गए।
रैयत मंगलवार को ब्रिटिश कोलंबिया सुप्रीम कोट में पेश हुआ। मामले की सुनवाई करने जा रही ज्यूरी के जज मार्क मैकइवान ने अपने साथियों से कहा कि वे इस मामले को सही ढंग से खंगाले क्योंकि सबूतों के लिहाज से ऐसा करना महत्वपूर्ण है।
इस मामले की सुनवाई के शुरुआती तीन-चार दिनों तक साक्ष्यों पर गौर किया जाएगा। इसके बाद दोनों पक्षों के वकील कानूनी दलील पेश करेंगे। इस मामले में किसी भी गवाह को नहीं बुलाया जाएगा। इस मामले का फैसला वर्ष 2003 में रैयत के कबूलनामे के आधार पर होगा। अगर रैयत फिर से दोषी करार दिया जाता है तो उसे 14 साल जेल की सजा हो सकती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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