बिंद्रा के पिता को 27.25 करोड़ रुपये का बकाया चुकाने को कहा
पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने इस सप्ताह ए. एस. बिंद्रा के स्वामित्व वाली पंजाब मीट्स लिमिटेड (पीएमएल) को यह भुगतान करने को कहा है।
एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी के एक वकील ने रविवार को बताया, "पीएमएल कंपनी इससे पहले यह भुगतान करने में विफल रही थी। इसके बाद इसे रुग्ण औद्योगिक इकाई घोषित कर दिया गया था। उस वक्त जून 2006 में उसने वास्तविक 40.90 करोड़ रुपये की राशि के बदले एकमुश्त 13.25 करोड़ रुपये का भुगतान कर मामले का निपटारा करने का प्रस्ताव रखा था।"
उन्होंने कहा, "पीएमएल की ओर से कोई भुगतान नहीं किया गया और इसमें लगातार देरी की जाती रही। पीएमएल ने अदालत के समक्ष गलत दस्तावेज पेश किए और साबित करने की कोशिश की कि वास्तविक बकाया राशि 32.25 करोड़ रुपये हैं न कि 40.90 करोड़ रुपये।"
बहरहाल, मुख्य न्यायाधीश मुकुल मुद्गल के नेतृत्व वाली उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने शुक्रवार को पीएमएल से 27.25 करोड़ रुपये की राशि अदा करने को कहा है।
अदालत ने कहा कि मामले के एकमुश्त निपटारे के लिए पीएमएल के समक्ष वर्ष 2006 में उचित विकल्प रखा गया था इसलिए अब वे किसी भी रियायत के योग्य नहीं है। कंपनी अपनी जमीन बेचकर अपीलकर्ता को चार सप्ताह के भीतर बकाया राशि का भुगतान करे।
इससे पहले, मई 2009 में बिंद्रा को दिल्ली पुलिस ने धोखाधड़ी के आरोप में पंजाब के जिरकपुर स्थित उनके फार्महाउस से गिरफ्तार किया था। इसके बाद छाती में दर्द की शिकायत के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ाना था।
उन पर आरोप था कि उन्होंने एक निजी वित्त कंपनी और एक अन्य वित्त कंपनी से वर्ष 2006 और 2007 में नौ करोड़ रुपये कर्ज लेने के मामले में धोखाधड़ी की थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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