बिहार में किसानों को वैकल्पिक फसलें उगाने की सलाह

राज्य के प्रधान सचिव की अध्यक्षता में बनाए गए आपदा प्रबंधन समूह की बैठक प्रत्येक सोमवार को करने का निर्णय लिया गया है। इसमें सभी जिलाधिकारियों से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए राहत कार्यो में हुई प्रगति की समीक्षा की जाएगी।

राज्य के आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव ब्यास जी ने शनिवार को बताया कि सूखे से संबंधित विभागों के प्रमंडलस्तरीय अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रमंडलीय आयुक्त तथा जिलास्तरीय अधिकारियों और कर्मचारियों को जिलाधिकारी की बगैर अनुमति के मुख्यालय छोड़ने पर रोक लगा दी गई है।

उन्होंने बताया कि किसानों को बीज की खरीद पर 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। कृषि वैज्ञानिक गांवों में दौरा कर कृषकों को मक्का, बाजरा, सरसों आदि वैकल्पिक फसलों को उपजाने के गुर सिखाएंगे। पशुओं के चारे के लिए बरसीम उपजाने की सलाह दी जाएगी।

सूखाग्रस्त जिलों में निराश्रित, विकलांग, 60 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्ति तथा विधवाओं को प्रतिमाह 600 रुपये दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि सभी राहत कार्य सितंबर से प्रारंभ कर दिए जाएंगे।

राज्य सरकार बाद में सूखाग्रस्त घोषित शेष 10 जिलों में सूखा पीड़ितों के लिए 1,600 करोड़ रुपये की मांग के लिए प्रस्ताव तैयार करने में जुटी है। आपदा प्रबंधन विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक यह प्रस्ताव 23 अगस्त को केन्द्रीय कृषि मंत्रालय को सौंपे जाने की संभावना है। इस प्रस्ताव में 100 मेगावॉट अतिरिक्त बिजली उपलध कराने की मांग भी शामिल है।

उल्लेखनीय है कि सरकार ने तीन अगस्त को राज्य के 38 में से 28 जिलों को सूखाग्रस्त घोषित किया था। इसके लिए केन्द्र से 5,062 करोड़ रुपये की मदद मांगी गई है। इसके बाद 15 अगस्त को शेष 10 जिलों को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया गया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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