केंद्र सरकार कैसे नहीं करेगी बकाए का भुगतान : नीतीश (लीड-1)
नई दिल्ली, 21 अगस्त (आईएएनएस)। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार को कहा कि उनकी सरकार ने राज्य में राष्ट्रीय राजमार्ग की मरम्मत और रखरखाव पर 1,000 करोड़ रुपये की जो धनराशि खर्च की है, केंद्र सरकार को उसका भुगतान करना ही होगा। नीतीश ने जोर देकर कहा कि देखते हैं कि केंद्र इस धनराशि का भुगतान कैसे नहीं करती है।
नीतीश कुमार ने यहां आयोजित एक संगोष्ठी में कहा, "मैं देखूंगा, बिहार के लोग देखेंगे कि केंद्र सरकार इस धनराशि का भुगतान कैसे नहीं करती। हम उसे किसी भी हाल में नहीं छोड़ेंगे। हम उसे भुगतान के लिए मजबूर कर देंगे।"
प्रकाशनाधीन पत्रिका 'गवर्नेस नाउ' की ओर से 'बिहार ऑन मूव' शीर्षक पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए नीतीश ने ये बातें कहीं। वह अपने राजनीतिक विरोधियों द्वारा की जा रही उस आलोचना पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे, जिसमें कहा जा रहा है कि बिहार में सभी प्रगति दिल्ली से जाने वाले धन से हो रही है।
नीतीश ने कहा, "मैं इस आलोचना से भी खुश हूं। कम से कम इस आलोचना में यह बात तो स्वीकार की गई है कि बिहार में विकास कार्य हो रहे हैं। लेकिन दिल्ली से धन प्राप्त होने की बात झूठ का पुलिंदा मात्र है।"
नीतीश ने कहा, "जहां तक केंद्र से प्राप्त होने वाले अनुदान का सवाल है, हमें अपने बुरे दिनों में भी कोई मदद नहीं मिली है, जबकि अन्य राज्यों में सुनामी जैसी त्रासदी के पीड़ितों को अपने घरों के निर्माण के लिए प्रत्येक को 100,000 रुपये दिए जा रहे हैं। जम्मू एवं कश्मीर को नियमित रूप से मदद दी जा रही है, मुंबई में अधिक बारिश के लिए भी उसे मदद दी जाती है।"
नीतीश ने कहा, "हम इससे भी खुश हैं कि उन सभी को मदद मिल रही है। लेकिन जब हम 2008 में कोसी की बाढ़ में तबाह हो गए थे, उस समय भी केंद्र से बिहार के लिए हमें फूटी कौड़ी नहीं मिली थी। वर्ष 2007 में राज्य के 20 जिलों में बाढ़ थी, लेकिन हमें उस समय भी कोई मदद नहीं मिली।"
नीतीश कुमार ने कहा, "हमसे पहले की राज्य सरकार ने राज्य में क्षतिग्रस्त राष्ट्रीय राजमार्ग पर नामपट्टिका खड़ी कर दी, जिसमें लिख दिया गया कि इस हिस्से की सड़क केंद्र सरकार से संबंधित है।"
कुमार ने कहा, "मैं भी ऐसा कर सकता था। लेकिन केंद्र से कोष प्राप्त हुए बगैर हमने राज्य में 1,600 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग के पुनर्निर्माण और मरम्मत पर 1,000 करोड़ रुपये खर्च किए। जब हमने केंद्र से पैसे मांगा तो वहां से जवाब मिला कि वे पैसा नहीं देंगे, क्योंकि हमने उनसे पूछे बगैर यह काम किया। लेकिन मैं देखता हूं कि केंद्र सरकार अपने पेट में हमारा पैसा कैसे पचा लेती है।"
नीतीश ने कहा कि केंद्र सरकार, राज्य को जो भी धन देती है, वह केवल वित्त आयोग द्वारा निर्धारित वित्तीय फार्मूले पर आधारित बजटीय आवंटनों के रूप में होता है।
उन्होंने कहा, "देश के संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार हमें जो धन मिलना चाहिए, उसे देकर केंद्र सरकार कोई एहसान नहीं कर रही है। यह कोई भीख नहीं है।"
नीतीश ने कहा कि 2004-05 में बिहार के पास केवल 4,000 करोड़ रुपये का योजना परिव्यय था। पांच वर्ष बाद पांच गुना अधिक यानी 20,000 करोड़ रुपये का योजना परिव्यय तय करने में सक्षम हो गया।
राज्य में शासन की स्थिति पर नीतीश ने कहा, "पांच वर्ष पहले तक बिहार की समस्या बुरे शासन की नहीं थी, बल्कि समस्या शासन की पूर्ण अनुपस्थिति की थी।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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