राज्यसभा में नालंदा विश्वविद्यालय विधेयक पर चर्चा

नालंदा विश्वविद्यालय विधेयक, 2010 के पारित हो जाने के बाद बिहार के नालंदा जिले में केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी। यह विश्वविद्यालय पांचवीं शताब्दी में पूरे दक्षिण एशिया के विद्यार्थियों के लिए शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र था।

राज्यसभा में बिना किसी बाधा या विरोध के इस विधेयक पर बहस हुई। बहस के दौरान सदस्यों ने इस प्राचीन विश्वविद्यालय की उपलब्धियों के बारे में बताया और यह भी बताया गया कि इस विश्वविद्यालय की पुनस्र्थापना क्यों की जा रही है।

राज्यसभा के उपाध्यक्ष के.रहमान खान ने कहा, "बहस का स्तर इतना सारगर्भित और ऊंचा था कि मैं अपनी घड़ी देखना ही भूल गया।"

विधयेक को सदन में पेश करते हुए विदेश राज्यमंत्री परणीत कौर ने कहा कि इस विधेयक से एक ऐसी अंतर्राष्ट्रीय संस्था की स्थापना की जा सकेगी जहां बौद्धिक, दार्शनिक, ऐतिहासिक और आध्यात्म की शिक्षा ली जा सकेगी।

कौर ने सदन को यह भी बताया कि इस उद्देश्य के लिए सिंगापुर की सरकार 50 लाख डॉलर की सहायता देने की प्रतिबद्धता जता चुकी है।

बहस की शुरुआत करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्य बाल आप्टे ने कहा, "नालंदा विश्वविद्यालय भारत सहित दक्षिण एशिया के लिए एक ऐसा मंच होगा जहां से हम अपनी सांस्कृतिक धरोहर को विश्व स्तर तक पहुंचा सकते हैं।"

बहस में शामिल होते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ सदस्य कर्ण सिंह ने कहा कि यह विधेयक विदेश मंत्रालय द्वारा लाया गया है और इसे एक अंतर्राष्ट्रीय विश्ववाद्यालय के रूप में स्थापित किया जाएगा।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के सदस्य सीताराम येचुरी ने कहा, "नालंदा न केवल ज्ञान का मंदिर था बल्कि धार्मिक सहिष्णुता का भी एक मंदिर था। हमें इससे काफी कुछ सीखने की आवश्यकता है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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