कनाडाई सिख सांसद का लिट्टे को समर्थन से इंकार
टोरंटो, 19 अगस्त (आईएएनएस)। पिछले हफ्ते श्रीलंका के 500 तमिल शरणार्थियों से भरे एक जहाज के वैंकूवर पहुंचने पर कनाडाई लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस बीच कनाडा के प्रथम सिख सांसद गुरबक्स सिंह माल्ही को 'लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम' (लिट्टे) का समर्थन करने को लेकर विवादित मामले में घसीटा जा रहा है।
स्थानीय समाचार पत्र 'टोरंटो सन' के एक स्तंभकार द्वारा लिखे गए लेख में माल्ही को लिट्टे का कथित समर्थक बताए जाने पर सांसद ने नाराजगी जताई है।
श्रीलंका द्वारा मई 2009 में लिट्टे पर किए गए हमले को रोकने के लिए कनाडा के हस्तक्षेप की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों की एक रैली के दौरान माल्ही की बातों का हवाला देते हुए स्तंभकार इजरा लेवंत ने अपने लेख में लिखा है, "हम इन तमिल शरणाथिर्यो को क्यों बहका रहे हैं? पिछले महीने मार्च में पार्लियामेंट हिल पर आयोजित रैली में मौजूद सांसद माल्ही से इस बारे में पूछा जाना चाहिए। रैली में लिट्टे के झंडे और प्रभाकरन की तस्वीरें लगी हुई थीं।"
लेवंत ने आगे सांसद के हवाले से लिखा, "आप लोग यहां महान कार्य के लिए एकत्रित हुए हैं। मैं आपकी मदद करूंगा और आप लोगों के साथ हूं, क्योंकि आप सभी अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं।"
लेवंत ने कहा है कि माल्ही लिट्टे के झंडों के बीच खड़े थे और प्रदर्शनकारियों के नारे सुन रहे थे।
आरोपों पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए सिख सांसद ने कहा कि स्तंभकार ने तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया है। उन्होंने कहा, "मैंने लिट्टे का समर्थन केवल इसलिए किया था, क्योंकि हमारी निष्ठा दुनिया में मानवाधिकारों की रक्षा करने को कहती है।"
संपादक को लिखे गए एक पत्र में माल्ही ने स्पष्ट कहा कि उन्होंने रैली में दुनियाभर में हो रहे मानवाधिकार हनन के खिलाफ आवाज उठाई थी।
माल्ही ने कहा, "मैं उस आयोजन में वाकई मौजूद था लेकिन लेख में जिसका उल्लेख किया गया है वह वास्तव में तमिल-कनाडाई समुदाय की एक रैली थी।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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