सूखा प्रभावित बिहार में बिजली की समस्या
पटना, 19 अगस्त (आईएएनएस)। पूरा बिहार सूखे की चपेट में है और निजी व राजकीय नलकूपों को चलाने के लिए किसानों को आवश्यकता के अनुरूप बिजली नहीं मिल पा रही है। राज्य को तीन क्षेत्रों में बांटकर किसानों को कम से कम पांच से छह घंटे तक ही बिजली दी जा रही है।
बिजली के लिए केंद्रीय प्रक्षेत्र पर पूरी तरह निर्भर राज्य को आम दिनों में भी इसकी किल्लत का सामना करना पड़ता है ऐसे में किसानों को पटवन के लिए बिजली आपूर्ति करने के कारण विद्युत विभाग को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
विद्युत विभाग के अनुसार राज्य में केंद्रीय प्रक्षेत्र से 1692 मेगावाट बिजली कोटा निर्धारित है परंतु शायद ही कोटे के अनुरूप बिजली दी जाती है।
विद्युत विभाग के जन संपर्क अधिकारी हरेराम पांडेय ने गुरुवार को आईएएनएस को बताया कि केंद्रीय प्रक्षेत्र से राज्य को मुश्किल से 1100 से 1200 मेगावाट बिजली ही मिल पाती है। बिहार की अपनी इकाई बरौनी और कांटी से लगभग 125 मेगाावाट बिजली उत्पादन होता है लेकिन दोनो इकाइयां इतनी पुरानी हो गई हैं कि उनमें अक्सर तकनीकी समस्या आ जाती है।
इधर, पिछले दिनों मुख्यमंत्री नितीश कुमार की घोषणा के बाद किसानों को पांच से छह घंटे निर्बाध विद्युत आपूर्ति की जा रही है। पांडेय ने बताया कि राज्य को तीन क्षेत्रों में बांटकर विद्युत आपूर्ति की जा रही है। इसके तहत रात के बारह बजे से सुबह पांच बजे तक बिहार राज्य विद्युत बोर्ड के अधीन 13 ग्रिड सब-स्टेशनों में विद्युत आपूर्ति की जा रही है। सुबह आठ बजे से लेकर दिन के एक बजे तक 26 ग्रिड सब-स्टेशनों में और दोपहर एक बजे से लेकर शाम छह बजे तक 26 ग्रिड सब-स्टेशनों में निर्बाध बिजली आपूर्ति की जा रही है।
उन्होंने बताया कि राजधानी में किसानों की बिजली की समस्या या किसी भी प्रकार की शिकायत के लिए एक नियंत्रण कक्ष भी बनाया गया है।
उन्होंने बताया कि पूर्व में जब राज्य के 28 जिले सूखाग्रस्त घोषित किए गए थे तब राज्य सरकार ने केंद्र से 330 मेगावाट अतिरिक्त बिजली की मांग की थी।
उल्लेखनीय है कि राज्य के 38 जिलों में से 28 जिलों को तीन अगस्त को सूखाग्रस्त घोषित किया गया था, इसके बाद बारिश की स्थिति ठीक नहीं होने के कारण शेष बचे 10 जिलों को भी 15 अगस्त को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया गया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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