शराब पीकर दौड़ेगी गाड़ी !

एडिनबरा नेपियर यूनिवर्सिटी ने इसके लिए पेटेंट की अर्ज़ी भी दाखिल कर दी है. उनका कहना है कि ये ईंधन एथनॉल जैसे मौजूदा जैविक ईँधनों से तीस प्रतिशत ज़्यादा कारगर है. वैज्ञानिकों ने इस पर पिछले दो सालों से काम किया है. उन्होंने इसके लिए एक ऐसी विधि का इस्तेमाल किया है जिसे एक सदी से भी ज़्यादा समय से ब्यूटामॉल जैविक ईंधन बनाने के लिए अपनाया गया है.
लेकिन ये प्रक्रिया जो कभी काफ़ी लोकप्रिय थी बेहद मंहगी मानी गई है. लेकिन शोध दल का कहना है कि उन्होंने इसका तोड़ निकाल लिया और व्हिस्की बनाने के दौरान निकले कचरे का इस्तेमाल किया और ब्यूटामॉल बनाया. इस शोध दल का नेतृत्व करनेवाले प्रोफ़ेसर मार्टिन टैंगने का कहना है कि ब्यूटामॉल में लगभग उतनी ही उर्जा है जितनी पेट्रॉल में.
उनका कहना है कि यदि उनकी योजनाओं को कामयाबी मिलती है तो दो साल के भीतर ये बाज़ार में उपलब्ध हो जाएगा. इसके अलावा एथनॉल जैसे अन्य जैविक ईंधनों की तरह इसके इस्तेमाल के लिए आधुनिक कारों को मंहगे उपकरण नहीं लगाने होंगे.












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