अलीगढ़ में किसानों का आंदोलन जारी (लीड-1)
लखनऊ/अलीगढ़, 18 अगस्त (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश सरकार और किसानों के बीच जारी तनातनी अलीगढ़ में बुधवार को भी जारी रहा। प्रदर्शनकारी किसानों ने नोएडा-आगरा यमुना एस्कप्रेसवे के लिए अपनी जमीन के बदले सरकार द्वारा बढ़ाई गई मुआवजे की नई राशि स्वीकारने से इंकार कर दिया।
पिछले तीन सप्ताह से जारी विरोध प्रदर्शन के, मुख्यमंत्री मायावती के विशेष दूत और राज्य के कैबिनेट सचिव शशांक शेखर सिंह द्वारा दिए गए नए सरकारी प्रस्ताव के बाद समाप्त होने की उम्मीद थी। लेकिन इस मुद्दे पर किसानों के बीच पैदा हुए मतभेद के कारण किसानों ने इस प्रस्ताव को मानने से इंकार दिया और एकजुट होकर लड़ाई जारी रखने का संकल्प लिया।
हजारों की संख्या में धरने पर बैठे किसानों ने बुधवार को नोएडा के बराबर मुआवजा न मिलने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया।
गिरफ्तार किए गए किसान नेता राम बाबू कथीरिया ने अलीगढ़ के टप्पल गांव में जुटे किसानों को बताया, "मुझे शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया और परिणाम भुगतने की चेतावनी दी गई थी, इसलिए मेरी मानसिक स्थिति बातचीत करने की नहीं है।"
सरकार ने पूर्व के 449 रुपये प्रति वर्ग मीटर मुआवजे के बदले 570 रुपये प्रति वर्ग मीटर कर दिया। इसके अलावा फसल, पेड़ या जलाशय जैसी जमीनों के लिए अतिरिक्त मुआवजे का भी वादा किया।
मुख्यमंत्री ने हिंसा में मारे गए या घायल हुए किसानों के परिजनों के लिए घोषित अनुग्रह राशि को क्रमश: पांच लाख से बढ़ा कर 10 लाख रुपये तथा दो लाख रुपये कर दिया।
कथीरिया ने कहा, "मित्रों हमें अपना आंदोलन तब तक जारी रखने की आवश्यकता है, जब तक कि राज्य सरकार 850 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से हमें भुगतान करने पर राजी नहीं हो जाती। राज्य सरकार द्वारा बनाए जा रहे किसी दबाव के आगे हम नहीं झुकने वाले।"
इसके पहले कथीरिया ने वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के साथ बातचीत के बाद किसानों का आंदोलन समाप्त करने को राजी हो गए थे।
लेकिन किसानों का रुख देखकर कथीरिया भी राज्य सरकार के साथ हुए समझ्झौते से पलट गए। बुधवार को उन्होंने समाचार चैनलों से बातचीत में किसानों की मांग दोहराते हुए कहा कि मुआवजा तो नोएडा के बराबर ही चाहिए, नहीं तो आंदोलन जारी रहेगा।
मुख्यमंत्री मायावती के विशेष दूत के तौर पर अलीगढ़ भेजे गए वरिष्ठ प्रशासिनक अधिकारी शशांक शेखर सिंह ने सोमवार देर रात किसान प्रतिनिधियों के साथ प्रस्तावित 449 रुपये प्रति वर्गमीटर के मुआवजे के स्थान पर 570 रुपये प्रति वर्गमीटर का मुआवजा देने का समझ्झौता किया था। समझौते में यह भी कहा गया था किसी भी किसान से जबरन जमीन नहीं ली जाएगी।
कथीरिया ने चर्चा में हिस्सा लेते हुए प्रति वर्गमीटर मुआवजे की रकम में 120 रुपये की वृद्धि पर सहमति जताई थी। बाद में किसानों ने कहा कि मुआवजे के संदर्भ में राज्य सरकार का फैसला एकतरफा है।
दूसरी ओर मुआवजे के खिलाफ किसानों के हिंसक प्रदर्शन के एक दिन बाद आगरा में बुधवार को किसानों और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच वार्ता हुई।
मंगलवार को आगरा से 20 किलोमीटर दूर एत्मादपुर तहसील में हुए हिंसक प्रदर्शन में दो सरकारी अधिकारियों के अलावा आधा दर्जन पुलिसकर्मी घायल हो गए थे।
अधिकारियों ने बुधवार को एत्मादपुर के करीब स्थित चेलसार में किसानों की संघर्ष समिति के नेताओं से वार्ता की। इस बैठक में अधिकारियों ने किसान नेताओं से हिंसा बंद करने की अपील की।
एत्मादपुर इन दिनों छावनी में तब्दील हो गया है। आस-पास के इलाकों में बड़े पैमाने पर सुरक्षा बंदोबस्त किए गए हैं।
पर्यावरण के लिए काम कर रहे रवि सिंह ने कहा, "एक्सप्रेस वे के लिए सरकार कुछ भी करना चाहती है। आखिर नए शहरी केंद्र बनाने के लिए वह किसानों की जमीन क्यों अधिग्रहित कर रही है।"
उन्होने कहा, "यह यमुना नदी के आसपास के पर्यावरण के लिए बेहद खतरनाक है।"
'एनवायन्मेंट प्रोटेक्शन ग्रुप फ्रेंड्स ऑफ वृंदावन' (एफओवी) ने भी इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शित किया। इस समूह के संस्थापक जगदीश पोद्दार ने कहा, "विकास की कोई भी परियोजना प्रकृति को नुकसान पहुंचाने वाली नहीं होनी चाहिए।"
ज्ञात हो कि एक्सप्रेस वे बनने के बाद दिल्ली से आगरा की दूरी तय करने में केवल 90 मिनिट लगेंगे। यह एक्सप्रेस वे गौतमबुद्ध नगर, अलीगढ़, महामाया नगर (हाथरस) और मथुरा के करीब 115 गांवों की अधिग्रहित की जा रही जमीनों से गुजरेगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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