कीड़ों में भी होती है आत्म-सुरक्षा की प्रवृत्ति

'करंट बायलॉजी' के नए अंक में प्रकाशित हुई रिपोर्ट का हवाला देते हुए 'साइंसडेली' के बताया है कि शाकाहारी जीव-जंतु जब पेड़-पौधों को अपना आहार बनाते हैं तो वहां मौजूद कीड़े उनके लिए अतिरिक्त प्रोटीन का स्रोत हो सकते हैं लेकिन कीड़ों के पास इस दुर्भाग्य से बचने के लिए एक रणनीति होती है।

इजरायल के हेफा विश्वविद्यालय के मोशी इंबार कहते हैं कि जब बड़े जानवर तेजी से पेड़-पौधों को अपना भोजन बनाते हैं तो उन पर रहने वाले छोटे-छोटे कीड़े असहाय नहीं होते हैं, वे खतरे को भांपकर उस समय वहां से गायब हो जाते हैं।

वह कहते हैं कि उन्होंने अपने अध्ययन में पाया कि कीड़ों को हमारी सांस से खतरे का आभास हो जाता है।

शोधकर्ताओं ने एक प्रयोग किया जिसमें उन्होंने एक बकरी को अल्फाल्फा पौधा खाने के लिए दिया। इसमें छोटे-छोटे कीड़े थे। बकरी द्वारा पौधे को खाए जाने से पहले ही इनमें से 65 प्रतिशत कीड़े जमीन पर गिर गए थे।

उन्होंने कहा कि बकरी के आने पर पौधे के हिलने, अचानक पौधे पर छांव पड़ने या बकरी की सांस के चलते कीड़े जमीन पर गिरे। एक चौथाई कीड़े पौधे के हिलने पर जमीन पर गिरे जबकि आधे से ज्यादा कीड़े बकरी सांस से खतरे को भांपकर जमीन पर गिरे।

शोधकर्ताओं ने बताया कि स्तनधारियों की सांस के गर्म व आद्र्र होने की वजह से कीड़े खतरा भांपकर नीचे गिर जाते हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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