'भारत बाहरी और आंतरिक आतंकवादी खतरे झेल रहा है' (लीड-1)
वाशिंगटन, 6 अगस्त (आईएएनएस)। पाकिस्तान के लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद व बांग्लादेश के हरकत-उल-जिहाद-ए-इस्लामी-बांग्लादेश जैसे आतंकवादी समूहों से 'लगातार और गंभीर बाहरी खतरों' के अलावा भारत घरेलू आतंकवादी समूहों से भी हमले झेल रहा है।
एक नई अमेरिकी रिपोर्ट के अनुसार भारत में 2009 में आतंकवादी हमलों में 1,000 से ज्यादा लोग मारे गए।
आतंकवाद निरोधक समन्वयक डेनियल बेंजामिन द्वारा गुरुवार को जारी की गई रिपोर्ट में कहा गया कि भारत आतंकवाद से सबसे ज्यादा पीड़ित देशों में एक है। वर्ष 2009 में आतंकवादी घटनाओं में यहां 1,000 से ज्यादा लोग जान गंवा चुके हैं। कश्मीर, पूर्वोत्तर और नक्सलियों के प्रभाव वाले इलाकों में आतंकवाद का व्यापक असर है।
रिपोर्ट के अनुसार आतंकवाद को खत्म करने की स्पष्ट प्रतिबद्धता के बावजूद भारत सरकार के आतंकवाद निरोधी प्रयासों में उसकी पुरानी कानूनी और प्रवर्तन प्रणालियां बाधक बनी हुई हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है, "26 नवंबर 2008 को मुंबई हमले के बाद हालांकि ऐसी कोई बड़ी वारदात नहीं हुई है लेकिन अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि भारत के समक्ष खतरा बरकरार है।"
श्रृंखलाबद्ध आतंकवादी हमलों का जिक्र करते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि पूर्व में आतंकवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित कश्मीर में हालांकि पिछले कुछ वर्षो में आतंकवादी हमलों में काफी गिरावट आई है।
रिपोर्ट में केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम का जिक्र करते हुए कहा गया है कि दिसंबर में 700 विदेशी आतंकवादी देश में सक्रिय रहे हैं। साल के शुरू में यह संख्या 800 थी। नवंबर में विभिन्न आतंकवादी हमलों में देश में 71 नागरिक और 52 सुरक्षा बल मारे गए।
रिपोर्ट में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा संसद में दिए गए उस बयान का उल्लेख है जिसमें उन्होंने कहा था कि नक्सली घरेलू सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं। कहा गया है कि नक्सलियों ने पुलिस और स्थानीय सरकारी अधिकारियों पर कई हमले किए और रेलवे को बम से निशाना बनाया जिससे नागरिक मारे गए और सेवाएं बाधित हुईं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में 1990 में प्रतिबंधित किए गए एक उग्रवादी संगठन उल्फा की गतिविधियां सक्रिय हैं और उसके द्वारा किए गए बम विस्फोट में इस साल (2009) 27 लोग मारे गए।
रिपोर्ट के अनुसार मुंबई हमलों के मद्देनजर भारतीय संसद में आतंकवाद निरोधक कानूनों के पुनर्गठन के लिए विधेयक लाए गए और आतंकवाद से जुड़े मामलों की जांच और अभियोग केलिए एक राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) का गठन किया गया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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