दो दशक बाद भी नहीं भरे कुवैत के ज़ख्म

दो दशक बाद भी नहीं भरे कुवैत के ज़ख्म

दो अगस्त, 1990 को इराक़ी सेना ने कुवैत पर हमला कर उसपर कब्ज़ा कर लिया था. बीस वर्ष बाद भी कुवैत के लोग इराक़ को माफ़ नहीं कर पाए हैं.

कुवैत के नागरिकों के ज़हन में 20 वर्ष पहले की वो घटना आज भी ताज़ा है जब इराक़ के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन के आदेश पर दो अगस्त, 1990 में इराक़ी सेना ने अपने पड़ोसी देश कुवैत पर हमला कर दिया था.

इराक़ी टैंक और हेलिकॉप्टर सरहद पार करके कुवैत की सीमा में घुस गए थे और कुछ ही घंटों में कुवैत उनके कब्ज़े में आ गया था.

हालांकि सात महीने बाद ही अमरीका के नेतृत्व में गठबंधन सेना ने इराक़ी सेनाओं को कुवैत से बाहर निकाल दिया था.

बीबीसी संवाददाता फ़्रैंक गार्डनर हमले के दौरान खाड़ी में मौजूद थे. उन्हें 20 साल पहले हुए इस हमले की तस्वीर साफ़ याद है.

दो अगस्त 1990 की तारीख़, तपती गर्मी के मौसम में आधा कुवैत खा़ली हो चुका था.

तेल के उत्पादन करने वाले शेख़ और बड़े कारोबारी काहिरा या फिर लंदन जैसी जगहों पर भाग गए थे जहां मौसम थोड़ा ठंडा था.

जब सद्दाम हुसैन की सेनाएं कुवैत की सीमा लांघकर पार कर गईं थीं तब कुवैत की सेना उसके सामने बिल्कुल बौनी लगने लगी थी. युगोस्लाविया से आयात टैंक अपने बैरकों में बिल्कुल बेकार धरे के धरे रह गए थे.

अगले सात महीनों तक कुवैत के नागरिक इराक़ी ख़ुफ़िया एजेंसियों के ख़ौफ़ में जीते रहे. इराक़ी सेनाओं को रोकने की कोशिश करने वालों उसी वक़्त मार दिया जाता था.

लेकिन इराक़ की ये मनमानी ज़्यादा दिन तक नहीं चल पाई और अगले साल 'डेज़र्ट स्टार्म' मुहिम से कुवैत को इराक़ के कब्ज़े से आज़ादी मिल गई.

उसके बाद इराक़ को कुवैत में क्षतिपूर्ति के लिए अरबों डॉलर देने पड़े थे.

लेकिन 20 वर्ष बीत जाने के बाद भी कुवैत के नागरिक आज भी इराक़ के उस कदम को न भूले हैं और न ही माफ़ कर पाए हैं.

दोनों ही पड़ोसी देशों के बीच रिश्ते काफ़ी तनावपूर्ण बने हुए हैं.

आलम ये है कि आज भी कई कुवैती बुज़ुर्ग तो यमन को भी नहीं माफ़ कर पाए हैं क्योंकि यमन ने चुपचाप इराक़ के हमले का समर्थन किया था. हालांकि इस कदम से यमन की अर्थव्यवस्था तबाह हो गई थी.

कुवैत के लोग दो अगस्त को इराक़ी हमले की बरसी मानकर उसे याद कर रहे हैं.

इस हमले के बाद अगस्त, 1990 में सात महीने तक कुवैत में कामकाज ठप्प पड़ गया था. ये हालात अमरीका के नेतृत्व में सद्दाम हुसैन की सेना को बाहर निकालने की मुहिम के बाद ही ख़त्म हो पाए थे.

कुवैती लोगों के लिए इस हमले के ज़ख्म आज भी ताज़ा हैं और वे अब भी इराक़ की तरफ़ दोस्ती का हाथ नहीं बढ़ा पाए हैं.

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+