कश्मीर पर लोकसभा में चिंता, उमर मिले प्रधानमंत्री से (लीड-3)

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अन्य केंद्रीय मंत्रियों के साथ घाटी की स्थिति पर करीब दो घंटे तक चर्चा के बाद अब्दुल्ला ने कहा कि कोई भी राजनीतिक या प्रशासनिक कदम उठाए जाने से पहले केंद्र और राज्य सरकार घाटी में सामान्य स्थिति बहाल करने को लेकर सहमत हैं।

अब्दुल्ला ने घाटी की समस्या के समाधान के लिए राजनीतिक पैकेज की जरूरत बताते हुए कहा, "मैं नहीं समझता कि घाटी में जो कुछ भी हो रहा है उसके पीछे किसी विशेष समूह या व्यक्ति का हाथ है।"

उन्होंने कहा, "यद्यपि घाटी में कई ऐसे तत्व हैं लेकिन वहां जो कुछ भी हो रहा है उससे देखकर लगता है कि वह नेतृत्वविहीन है।"

इससे पहले केंद्र सरकार ने कश्मीर में जारी पथराव और प्रदर्शनों के लिए पाकिस्तान स्थिति समूहों को जिम्मेदार ठहराया था।

प्रधानमंत्री आवास पर हुई इस बैठक में केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी, केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम, रक्षा मंत्री ए. के. एंटनी और विदेश मंत्री एस. एम. कृष्णा शामिल थे।

उमर ने कहा, "हिंसा के दौरान हमने अपनों को खोया है। प्रदर्शनकारी एक घटना के बाद प्रदर्शन करते हैं और हिंसा में एक और व्यक्ति की मौत हो जाती है। हिंसा के इस दुष्चक्र को निश्चित तौर पर रोकना होगा।"

अब्दुल्ला ने कहा कि कश्मीर की समस्या एक राजनीतिक समस्या है और इसका समाधान भी राजनीतिक तरीके से करने की जरूरत है। उन्होंने सैन्य बलों को विशेषाधिकार देने संबंधी कानून को हटाने और नियंत्रण रेखा के पार के इलाकों में रहने वाले युवाओं को बुलाने जैसे कदम उठाए जाने की जरूरत पर बल दिया।

उन्होंने घाटी के प्रदर्शनकारियों को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि कानून को अपने हाथ में लेने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने हिंसा पर काबू पाने के लिए अतिरिक्त अर्धसैनिक बलों की भी मांग की।

उन्होंने कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री होने के नाते उनकी जिम्मेदारी है कि वह घाटी में शांति स्थापित करें लेकिन पर्याप्त सुरक्षा बलों के अभाव में वह कुछ नहीं कर सकते।

इधर घाटी की स्थिति पर लोकसभा में विपक्षी सदस्यों ने चिंता जताई जिसपर चिदंबरम ने कहा कि वहां की स्थिति 'गंभीर' है और वह जम्मू एवं कश्मीर के मुख्यमंत्री के साथ चर्चा के बाद इस मसले पर बयान देंगे।

लोकसभा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा, "बीते कुछ दिनों से कश्मीर में स्थिति चिंताजनक है। कल (रविवार) सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक भी हुई थी। हम सरकार से यह जानना चाहते हैं कि पूरी स्थिति क्या है और इस पर क्या कदम उठाए जा रहे हैं।"

इस मामले पर जनता दल (युनाइटेड) के अध्यक्ष शरद यादव ने कहा, "कश्मीर के हालात चिंताजनक हैं। मैं समझता हूं कि सरकार इस मामले को लेकर चिंतित है और ऐसे में हम भी पूरी स्थिति से अवगत होना चाहते हैं। हम इस मामले में सरकार का पूरा सहयोग करेंगे।"

कश्मीर के हालात पर समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता मुलायम सिंह यादव ने भी चिंता जताई। उन्होंने कहा, "कश्मीर को लेकर बड़ी समस्या यह है कि अब तक कोई भी सरकार वहां के लोगों का विश्वास नहीं जीत पाई है। समस्या को हल करने के लिए हम सभी को कश्मीर के लोगों का विश्वास जीतना जरूरी है।"

उधर, घाटी में सोमवार को एक घायल युवक की मौत के बाद पिछले चार दिनों से जारी हिंसा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 15 हो गई। कर्फ्यू का उल्लंघन करते हुए श्रीनगर के कई स्थानों पर भीड़ फिर जमा हो गई। दक्षिणी कश्मीर के बारामूला में आंसू गैस के गोले की चपेट में आकर 31 जुलाई को घायल हुए ताहिर अहमद नाम के युवक की सोमवार को मौत हो गई।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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