एनआईए करेगी समझौता एक्सप्रेस विस्फोट की जांच : चिदंबरम (लीड-1)
गृह मंत्रालय की जुलाई महीने की मासिक प्रगति रिपोर्ट जारी करते हुए चिदंबरम ने कहा कि सरकार कश्मीर के विभिन्न समूहों के साथ घाटी के हालात पर चर्चा करने को तैयार है।
असम में शुक्रवार को हुए विस्फोट के बारे में पूछे जाने पर, जिसमें अर्धसैनिक बल के चार जवान मारे गए थे, चिदंबरम ने कहा कि जवानों पर तब हमला किया गया, जब वे एक सैन्य प्रशिक्षण केंद्र से आ रहे थे।
उन्होंने कहा कि असम में सभी समूह बातचीत के लिए आगे नहीं आए हैं और युनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) और नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (एनडीएफबी) संवाद प्रक्रिया में शामिल नहीं हो पाए हैं।
नक्सल समस्या पर पूछे गए सवालों के जवाब देते हुए चिदंबरम ने कहा कि यह समस्या 1960 के दशक से ही है और कभी यह समस्या उफान पर आती रही है और कभी यह नियंत्रित रही है। उन्होंने कहा कि अंतत: नक्सलियों का हृदय परिवर्तन होना ही है।
चिदंबरम ने कहा, "उन्हें अपनी विचारधारा त्यागनी है। संसदीय लोकतंत्र में इस विचारधारा के लिए कोई जगह नहीं है। सरकार द्वारा किए जा रहे सुरक्षात्मक और विकास संबंधी प्रयासों से इस समस्या पर तीन वर्षो के भीतर बुनियादी तौर पर लगाम लगा दिया जाएगा। यही लक्ष्य है।"
चिदंबरम ने कह कि समझौता एक्सप्रेस विस्फोट मामले की जांच एनआईए के हवाले इसलिए किए जा रहा है, क्योंकि अब तक इसे सुलझाया नहीं जा सका है।
चिदंबरम ने कहा, "एनआईए को समझौता एक्सप्रेस में विस्फोट और हैदराबाद में डेलाइट टच तोहमास्तु पर हमले की योजना की जांच का निर्देश दिया गया है।"
गृह मंत्री ने कहा, "कुछ पुराने मामले हैं जिन्हें अब तक नहीं सुलझाया जा सका है। उन्हें एनआईए को सौंपा जा रहा है क्योंकि हम इन मामलों को सुलझाना चाहते हैं। इनमें समझौता एक्सप्रेस एक उदाहरण है।"
18 फरवरी 2007 में हरियाणा के पानीपत में दीवाना रेलवे स्टेशन के पास समझौता एक्सप्रेस में बम विस्फोट हुए थे जिनमें कम से कम 68 लोग मारे गए थे। यह ट्रेन भारत-पाकिस्तान के बीच चलती है।
एक अन्य मामले में इसी साल लश्कर-ए-तैयबा के एक संदिग्ध सदस्य को गिरफ्तार किया गया था जो हैदराबाद में एक बहुराष्ट्रीय लेखा कंपनी डेलाइट टच तोहमास्तु पर हमले की योजना बना रहा था।
समझौता एक्सप्रेस मामले की जांच हरियाणा के विशेष जांच दल के जिम्मे थी। मालेगांव बम विस्फोटों की जांच करने वाली महाराष्ट्र पुलिस ने एक बार कहा था कि समझौता एक्सप्रेस में हुए बम विस्फोटों के पीछे कट्टर हिंदूवादी ताकतों का हाथ है।
लेकिन चिदंबरम ने किसी की तरफ उंगली उठाने से इंकार किया और कहा कि मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है।
उन्होंने हालांकि यह भी कहा कि इन मामलों को सुलझाने के लिए एनआईए सबसे बेहतर एजेंसी है क्योंकि यह अजमेर बम विस्फोट, मक्का मस्जिद विस्फोट और मालेगांव हमलों जैसे अंतर्राज्यीय जांचों को देख सकती है। इन सभी मामलों की जांच तीन अलग-अलग राज्यों की पुलिस एजेंसियों द्वारा की जा रही है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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