भारत के कारण आतंकवाद के खिलाफ पाक की प्रतिबद्धता प्रभावित
वाशिंगटन, 29 जुलाई (आईएएनएस)। अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत हुसैन हक्कानी ने स्वीकार किया है कि भारत के प्रति इस्लामाबाद की 'मनोग्रंथी' के कारण आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में पाकिस्तान की प्रतिबद्धता प्रभावित होती है।
हक्कानी ने पीबीएस से कहा, "सबसे बड़ी चिंता है कि भारत हमारे तरह के पड़ोसी और राज्य के साथ सुलह के लिए तैयार नहीं है। इससे जुड़ी चिंताएं सार्वजनिक विचारों में प्रकट होती हैं।"
उन्होंने कहा कि सरकार को इस धारणा से भी निपटना है कि अमेरिका पाकिस्तान का स्थाई दोस्त नहीं है और यदि अमेरिका के आदेश पर बहुत अधिक किया गया तो वह एक बार फिर मुसीबत में छोड़कर जा सकता है।
हक्कानी ने कहा कि पाकिस्तान 50 के दशक में अमेरिका का सहयोगी बना था और वह दक्षिण पूर्व एशिया और केंद्रीय संधि संगठनों का हिस्सा था।
उन्होंने कहा कि भारत के बारे में पाकिस्तान की चिताओं को अमेरिका ने अभी दूर नहीं किया है और क्षेत्र में बारे में पाकिस्तान की चिंताओं को समझा नहीं गया है।
हक्कानी ने कहा कि इस्लामाबाद अफगानिस्तान में अपना प्रभाव जमाना नहीं चाहता है। वास्तव में वह अफगानिस्तान में भारत के बढ़ते प्रभाव से चिंतित है।
हक्कानी ने कहा, "हम अफगानिस्तान में भारत के प्रभाव से चिंतित हैं क्योंकि भारत के साथ हमारा संघर्ष है और हम दोनों ओर से घिरना नहीं चाहते।"
हक्कानी ने कहा कि इसका हल भारत और अफगानिस्तान दोनों से वार्ता करना है। पाकिस्तान पड़ोसियों के साथ अच्छे संबंध चाहता है। अफगानिस्तान में अपना प्रभाव जमाने का उसका कोई इरादा नहीं है।
पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और हक्कानी गुट के साथ संबंध होने संबंधी अमेरिकी ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ समिति के अध्यक्ष एडमिरल माइक मुलेन के बयान पर राजदूत ने कहा, "लश्कर-ए-तैयबा पाकिस्तान में एक प्रतिबंधित संगठन है। परंतु कुछ तत्व उससे जुड़े हैं और काम कर रहे हैं। पाकिस्तान इससे निपट रहा है।"
हक्कानी ने कहा कि पाकिस्तान सरकार भारत से संबंध सुधारने को लेकर बहुत गंभीर प्रयास कर रही है कुछ मुद्दों पर गतिरोध है। उनको सुलझाने का प्रयास जारी है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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