ब्रिटिश कंपनियों ने करोड़ों पाउंड के समझौते किए
इन कंपनियों ने आधारभूत संरचना, उच्च प्रौद्योगिकी और रक्षा क्षेत्र में निवेश एवं व्यापार के समझौतों पर हस्ताक्षर किए।
पत्रकारों से बातचीत करते हुए केबल ने कहा, "भारत ऐसा देश है जहां सफलता प्राप्त करने के लिए आपको बहुराष्ट्रीय बनने की आवश्यकता नहीं है। भारतीय कंपनियों के साथ मिलकर यहां ब्रिटिश कंपनियों ने शानदार प्रदर्शन किया है और हम ज्यादा से ज्यादा ब्रिटिश कंपनियों यहां संभावनाएं तलाशने के लिए प्रोत्साहित करेंगे।"
विनिर्माण मशीनें बनाने वाली जे. सी. बेम्फोर्ड (जेसीबी) की एक लाखवीं मशीन बाजार में उतारने के अवसर पर पत्रकारों से बात करते हुए केबल ने कहा, "बेनॉय आर्किटेक्चर कंपनी यहां आधारभूत संरचना के क्षेत्र में काम करेगी, पिकोचिप 4जी तकनीक के लिए नेटवर्क स्थापित करेगी और बीएई एवं ग्रीफोन्स यहां रक्षा क्षेत्र में काम करेंगी।"
इस अवसर पर मौजूद सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री कमलनाथ ने वर्ष 1993 में ब्रिटिश प्रधानमंत्री जॉन मेयर के भारत दौरे को याद करते हुए कहा, "मुझे याद है जब 17 साल पहले जॉन मेयर भारत के दौरे पर आए थे और तब भारत और ब्रिटेन के बीच आर्थिक संभावनाओं को स्वीकार किया गया था।"
केबल द्वारा घोषित किए गए समझौते निम्मलिखित हैं:
- लंदन स्थित बेनॉय आ*++++++++++++++++++++++++++++र्*टेक्चर बेंगलुरू और मुंबई में तीन परियोजनाओं पर काम करेगी। इसमें बेंगलुरू एक्सप्रेसवे पर रिटेल केंद्र का विकास, बेंगलुरू में एक आवासीय काम्प्लेक्स का निर्माण और मुंबई में व्यावसायिक जमीन का मिश्रित उपयोग करना शामिल है।
- सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की कंपनी पिकोचिप भारत में 4जी प्रौद्योगिकी के आधार स्टेशन स्थापित करने के लिए वायरलेस बेसबैंड प्रौद्योगिकी उपलब्ध कराएगी। यह कंपनी भारत में रेंकोर टेक्नॉलाजीस लिमिटेड के साथ करोड़ों पाउंड के समझौते के तहत काम करेगी।
- हॉवरक्राफ्ट विमानों की निर्माता कंपनी ग्रीफोन हॉवरवर्क 3.4 करोड़ पाउंड की कीमत के हॉवरक्राफ्ट विमान भारतीय तटरक्षक बलों को बेचेगी।
- व्यापार संवर्धन कंपनी एक्सचेंजिंग ने कर्नाटक सरकार के साथ विशेष आर्थिक क्षेत्र में एक संवर्धन केंद्र शुरू करने के लिए सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए।
इससे पहले बुधवार को ब्रिटिश विमान निर्माता कंपनी बीएई सिस्टम्स ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को 57 हॉक प्रशिक्षण विमान बनाने का लाइसेंस देने के लिए 70 करोड़ पाउंड का समझौता किया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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