नेपाल में ईसाइयों पर फिर हमले

शेर बहादुर पून एक सेवानिवृत्त नेपाली सैनिक हैं। इन्होंने भारतीय सेना में भी काम किया है। पश्चिमी नेपाल के म्यागदी जिले के आउलो गांव में पिछले महीने वह अपने बेटे अक्का बहादुर पून के साथ मास (रोमन कैथोलिक लोगों की एक प्रार्थना) में भाग ले रहे थे। इसी दौरान भीड़ ने उन पर हमला कर दिया।

पून हिंदू थे लेकिन भारतीय सेना में रहते समय चेन्नई में उन्होंने ईसाई धर्म स्वीकार कर लिया था। उनका बेटा जन्म से ईसाई है जो आउलो में एक छोटे से प्रोटेस्टैंट गिरिजाघर में पादरी है।

अप्रैल में गांव में एक मंदिर बनाने का निर्णय लिया गया। पून ने गांववालों की उस बात को मानने से इंकार कर दिया था जिसमें उसे पूजा करने को कहा गया था। इसी इंकार के प्रतिशोध में यह हमला हुआ।

एक अमेरिकी संगठन की स्थानीय शाखा वायस ऑफ द मार्टर-नेपाल के कार्यक्रम संयोजक मदान अधिकारी कहते हैं, "5 जून को करीब 50 लोग गिरिजाघर में प्रार्थना कर रहे थे। इसी दौरान करीब दो दर्जन लोगों ने हमला कर दिया।"

अधिकारी ने बताया, "भीड़ में शामिल लोगों ने प्रार्थना बंद करने को कहा। पून से जब इससे इंकार किया तो भीड़ ने उस पर हमला कर दिया जिससे उनकी दो पसलियां टूट गईं।"

गिरिजाघर को बंद कर दिया गया और पून गांव छोड़ने पर मजबूर हो गए। बाप-बेटे ने जिले के मुख्य कस्बे बेणी में शरण ली।

दोनों को बाद में गांव वापस लौटने की अनुमति मिल गई हालांकि गिरिजाघर अब भी बंद है।

इससे पहले दक्षिणी नेपाल के कपिलवस्तु जिले के चानाउता गांव में दो महिलाओं सहित पांच ईसाईयों पर हमला हुआ था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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