ईंधन कीमतों में वृद्धि वापस लेने से सरकार का इंकार
बढ़ी हुई कीमतों को वापस लेने की विपक्ष की मांग पर पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा ने संसद के बाहर पत्रकारों से कहा, "किसी की भी कार में प्रयोग किए जाने वाले पेट्रोल के लिए हर तिमाही सरकार को 5,000 करोड़ रुपये क्यों खर्च करना चाहिए?"
उन्होंने कहा, "पिछले चार वर्षो के दौरान कोई मूल्य वृद्धि नहीं हुई थी और अब जो वृद्धि हुई है वह बहुत मामूली है।"
देवड़ा ने कहा, "यदि वे (विपक्ष) एकजुट हैं तो वे कुछ अच्छे काम के लिए अवश्य एकजुट हों।"
इससे पहले, दिन में देवड़ा ने लोकसभा में कहा कि ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी से एक परिवार पर रोजाना रसोई गैस के खर्च पर एक रुपये से भी कम और केरोसीन के खर्च पर पचास पैसे का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
देवड़ा ने कहा, "26 जून को पेट्रोलियम पदार्थो की कीमतों में वृद्धि के पीछे 'प्राथमिक उद्देश्य' तेल विपणन कंपनियों पर सब्सिडी के बोझ को घटाना है। इससे स्वास्थ्य, शिक्षा और खाद्य सुरक्षा जैसी सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं में अधिक धन आवंटित किया जा सकेगा।"
राज्य सरकारों पर पेट्रोलियम पदार्थो पर लगने वाले करों की दरों को ऊंचा रखने का आरोप लगाते हुए देवड़ा ने कहा कि पेट्रोल और डीजल पर लगने वाला बिक्री कर क्रमश: 33 और 24.7 फीसदी है जो काफी अधिक है।
उन्होंने कहा, "कुछ राज्य सरकारें केरोसीन पर 12.5 फीसदी का बिक्री कर वसूल कर रही हैं। यह भी काफी ज्यादा है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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