ग्रीनपीस की सह संस्थापक डोरोथी स्टोव के जीवन का सफरनामा

नई दिल्ली, 24 जुलाई (आईएएनएस)। पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था ग्रीनपीस की सह संस्थापक, डोरोथी स्टोव का 23 जुलाई को कनाडा के वैंकूवर में निधन हो गया। वह 89 वर्ष की थीं।

डोरोथी एन्नी रैबिनोविट्ज का जन्म 22 दिसंबर, 1920 को रोडे द्वीप के प्रोविडेंस में हुआ था। उनके माता-पिता यहूदी थे, जो रूस और गैलीसिया से यहां आकर बस गए थे। वह अपने पिता जैकब को आदर्शवादी और राजनीतिक बताती थीं। वह अपने पिता के बारे में कहती थीं, "वह न केवल यहूदियों के साथ न्याय का पूरा ख्याल रखते थे, बल्कि हर किसी के साथ न्याय चाहते थे।" डोरोथी की मां रेबेका मिलर हीब्रू (यहूदी भाषा) पढ़ाती थीं और डोरोथी को शिक्षा ग्रहण करने के लिए प्रेरित करती थीं।

डोरोथी ने अमेरिका के पेमब्रोक कॉलेज से अंग्रेजी और दर्शनशास्त्र विषयों में पढ़ाई की और मनोरोग संबंधी सामाजिक कार्यकर्ता बन गईं। उन्होंने स्थानीय निकाय के कर्मचारी संघ के पहले अध्यक्ष के रूप में काम किया। दमनकारी मैकार्थी युग के दौरान, जब उन्होंने हड़ताल की धमकी दी थी, तो राज्य के गवर्नर ने उन्हें कम्युनिस्ट करार दिया। लेकिन वह अपनी जगह डटी रहीं और अपने युनियन की वेतन बढ़ोतरी की मांग को पूरा करवाने में सफल रहीं।

डोरोथी ने वर्ष 1953 में नागरिक अधिकार मामलों के अधिवक्ता, इर्विग स्ट्रैसमिक से शादी की। उन्होंने अपनी शादी का रात्रि भोज नेशनल एसोसिएशन फॉर द एडवांसमेंट ऑफ कलर्ड पीपुल (एनएएसीपी) नामक संस्था के साथ आयोजित किया था। इसी संस्था ने अमेरिका में नागरिक अधिकार आंदोलन की शुरुआत की थी।

उन्होंने अग्रणी नारीवादी और उन्मूलनवादी, हैरिएट बीचर स्टोव के सम्मान में अपना पारिवारिक नाम बदल कर स्टोव रख दिया था। बीचर स्टोव ने अमेरिका में दास प्रथा के अंत में मदद की थी। स्टोव को दो बच्चे रॉबर्ट (1955) और बारबरा (1956) हैं। दोनों इस समय वैंकूवर में रहते हैं।

वर्ष 1950 के दशक में डोरोथी इर्विग स्टोव ने क्वे कर के विचारों को अपनाते हुए परमाणु हथियारों के खिलाफ अभियान शुरू किया। क्वे कर की 'गोल्डेन रूल' और 'फोनिक्स' (1958) नामक नावों ने 12 वर्ष बाद स्टोव के उस निर्णय में प्रेरणा दी थी, जिसके तहत उन्होंने अलस्का में एमचिटका द्वीप परमाणु परीक्षण क्षेत्र तक नाव के जरिए यात्रा करने का निर्णय लिया था। ग्रीनपीस का यह पहला अभियान था।

वर्ष 1961 में अपने करों के जरिए विएतनाम युद्ध का समर्थन करने से बचने के लिए डोरोथी और इर्विग न्यूजीलैंड चले गए। वहां उन्होंने अमेरिकी दूतावास पर प्रदर्शन का नेतृत्व किया और पॉलीनेशिया में फ्रांस के परमाणु हथियार परीक्षणों का विरोध किया। लेकिन जब न्यूजीलैंड ने वर्ष 1965 में अपने सैनिकों को विएतनाम भेजा तो स्टोव अपने परिवार के साथ वहां से कनाडा चली गईं।

वैंकूवर में डोरोथी ने इर्विग की पूर्णकालिक समाजसेवा में मदद देने के लिए एक फैमिली थेरेपिस्ट के रूप में काम किया। उसी दौरार स्टोव की मुलाकात पत्रकार बॉब हंटर और बेन तथा डोरोथी मेटकैफ से हुई। इन सभी ने डोरोथी के अभियान में मदद की। एक शांति जुलूस में वह क्वे कर जिम और मैरी बोहलेन तथा हंटर की ब्रिटिश पत्नी जोए से मिलीं। इस समूह ने एक नए शांति एवं पर्यावरण संगठन का गठन किया, जिसने दुनिया को अपने चमत्कारिक विरोध प्रदर्शनों के जरिए हिला कर रख दिया।

जब अमेरिका ने वर्ष 1968 में अलस्का में कई सारे परमाणु परीक्षणों की घोषणा की, तो स्टोव ने "डोंट मेक ए वेव कमेटी" गठित की। यह शीर्षक परीक्षणों से पैदा होने वाली सूनामी के भय से प्रेरित था। डोरोथी स्टोव ने परमाणु परीक्षणों के रद्द किए जाने तक अमेरिकी उत्पादों का बहिष्कार करने के लिए सामाजिक कार्यकर्ताओं और महिलाओं का समूह खड़ा किया। जब जिम और मैरी बोहलेम ने परीक्षण क्षेत्र तक एक नाव में सवार होकर जाने का सुझाव दिया तो डोरोथी और इर्विग स्टोव राजी हो गए।

उन्होंने 'फिलिस कारमैक' नामक एक चपटी नाव किराए पर ली और उसका नाम 'ग्रीनपीस' रख दिया। नाव 1971 में प्रस्थान के लिए तैयार हुई। लेकिन अमेरिकी तट रक्षक ने उसे गिरफ्तार कर लिया और इस तरह वह नाव अलस्का द्वीप तक कभी नहीं पहुंच पाई। फिर भी इस यात्रा ने जन विद्रोह खड़ा किया और परिणामस्वरूप फरवरी 1972 में अमेरिका ने परमाणु परीक्षणों के अंत की घोषणा कर दी।

मई 1972 में संगठन ने अपना नाम बदल कर 'ग्रीनपीस' रख दिया। आज चीन और भारत सहित 40 देशों में इस संगठन के कार्यालय हैं और हाल में अफ्रीका में इसका कार्यालय खुला है। डोरोथी कहती थीं, "अपने घर की मेज के चारों ओर बैठकर चंद लोग जो हासिल कर सकते हैं, यह चकित करने वाला है।"

डोरोथी ने उन सैकड़ों युवा कार्यकर्ताओं को वर्षो से अपने पास रखा, जो प्रेरणा पाने के लिए उनके यहां पहुंचे। जब बैंड यू2 वर्ष 2005 में वैंकूवर पहुंचा तो गायक बोनो ने डोरोथी स्टोव से मिलने का विशेष प्रयास किया। डोरोथी अतीत की सफलताओं से चुप हो कभी नहीं बैठतीं और न तो सामाजिक परिवर्तन के काम को रोकती ही। उनके आजीवन समर्पण ने दुनिया भर के कार्यकर्ताओं को प्रेरित किया है।

निधन के एक महीना पहले डोरोथी ने ग्रीनपीस के नए अंतर्राष्ट्रीय कार्यकारी निदेशक कुमी नायडू के सम्मान में एक नाश्ता पार्टी अयोजित की थी। कुमी ने बाद में कहा कि वह बैठक उनके जीवन का एक अति प्रेरणादायी क्षण था, एक ऐसी महिला के आशावाद और उत्साह का गवाह बनना, जिसने अपना पूरा जीवन दूसरों के लिए दुनिया को बेहतर बनाने में समर्पित कर दिया।

डोरोथी स्टोव के लिए सबसे उपयुक्त श्रद्धांजलि यही होगी कि हम सभी सुबह उठें और शांति, न्याय तथा धरती की सेवा के कामों में लग जाएं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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