विधायकी छोड़ शिक्षक बनेंगे

नारायण बारेठ
बीबीसी संवाददाता, जयपुर
भारत में नेता सत्ता के ऊँचे मुकामो के लिए चुने जाने के बाद पेट्रोल पंप, गैस एजेंसी या कोई कीमती खदान आवंटित करने की जुगत करते हैं, लेकिन राजस्थान में एक दलित विधायक स्कूल लेक्चरर पद के लिए अपनी विधायकी कुर्बान करने को तैयार है.
धौलपुर ज़िले से विधायक चुने गए सुखराम कोली ने राज्य लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित स्कूली लेक्चरर की परीक्षा में भाग लिया और कहा कि अगर इसमें पास हो गया तो राजनीति छोड़ दूंगा.
राज्ये में आयोग की ओर से रविवार को आयोजित इस परीक्षा में कोई 33 हज़ार अभ्यार्थी शामिल हुए थे, उनमें विधायक कोली भी एक थे. कोली का राजनीति से मोह भंग हो गया है.
हालांकि उनके इलाके के लोग कहते है कि वो एक ईमानदार नेता है और उन्हें राजनीति से ऐसे पल्ला नहीं झाडना चाहिए. कोली ने बीबीसी से कहा, "मैं स्कूली लेक्चरर के पद के लिए गंभीरता से प्रयास कर रहा हूँ.जब जनता के काम नहीं करा सकते तो फिर विधायक बने रहने से क्या फायदा."
एमए, एमफ़िल और बीएड की तालीम हासिल कर चुके कोली भारत के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद, जाकिर हुसैन और लाल बहादुर शास्त्री को अपना आदर्श मानते है. मौजूदा नेताओ में उन्हें पूर्व प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी आदर्श लगते है. स्वर्गीय राजेंद्र बाबू तो खुद एक आदर्श शिक्षक थे.
ऐसा नहीं है कि कोली कोई संपन्न घर परिवार से हो. धरती के आधा बीघा दायरे में उनकी मिलकियत सिमटी है तो रहने को गाँव में एक कमरे का एक घर उनका आशियाना है.
वो कहते है, "मेरे माता पिता अब भी मजदूरी करते है. मैं अपने विधान सभा क्षेत्र में कोई सुधार नहीं करा सका, लेकिन मैं अध्यापक बन कर एक सौ बच्चों को पढ़ा कर काबिल बना सका तो ये मेरा सौभाग्य होगा. मैं पहले भी शिक्षा से जुड़ा हुआ था. जब हम कोई काम नहीं करा सकते तो विधायक होने का क्या मतलब रह जाता है."
उन्होंने कहा, ''हम सरकार से सवाल पूछते हैं और जनता हमसे सवाल पूछती है. हम लोगों के विश्वास पर खरे नहीं उतर पा रहे हैं."
'विधायक होने का क्या लाभ'
राज्य विधान सभा के लिए हर बार चुनाव में दो सौ विधायक चुने जाते है. लेकिन कोली ऐसे पहले व्यक्ति है जो इस ऊँचे सदन मे किसी भी कीमत में बने रहने का लोभ नहीं पाल सके है.
वे पूछते हैं, ''जब ग़रीब आदमी नरेगा पर काम कर सौ रूपए अर्जित करता है. वो अपने पैसे खर्च कर राजधानी जयपुर आता है और हम उसका काम नहीं करा सकते तो विधायक होने से क्या लाभ."
विधायक के सहपाठी रहे राधेश्याम कहते हैं, "कोली ज़मीर वाले व्यक्ति है. वे साहित्य में गहरी रूचि रखने वाले व्यक्ति है. ऐसे में मन में भावनाओं का ज्वार उठना वाजिब है."
बीजेपी विधायक कोली की पत्नी राजकुमारी कहती हैं, "मेरे पति सेवा का जज्बा रखते है. अगर शिक्षक बनने का फैसला किया तो ठीक ही है. "
लेकिन उनके चुनाव क्षेत्र के सुभाष कहते है, "हमें इस फैसेले से झटका लगा है. हम चाहते है वो लोगो की सेवा करे, हमने लोगो को अजमाने के बाद ही कोली को चुना था. वो नेक इंसान है.
विधायक कोली ने शिक्षक बनने का ख्वाब आषाढ़ के महीने में बुना जब भारत में गुरु पूर्णिमा पर गुरु की महिमा का बखान किया जाता है.
गुरु पूर्णिमा के साथ बताया जाता है कि विद्या का दान ही सर्वोतम है. लेकिन कोली जब तालीम की दुनिया में दाखिल होंगे तो उन्हें पता लगेगा कि वक्त यहाँ भी बदल गया है. अब विद्या का दाम ही सर्वोतम है.












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